जन-2 की समझ /पहुँच से दूर ,
मूर्ख बनते हंसी का पात्र ,
थोथी बातों में जीते जीवन,
बनता नियम उनका मात्र
2/200
(ञृणी कृष्णा के ;जीवन -मरते ,
शब्द बने माध्यम हमसे ,
भला हो सबका ,
यही रहे दुआ दिल से ,
2/201
कृपा बरसे माधव की ,
सब के काम बने सुबह -साम,
हंसी खुशी से गुजरे जिन्दगी
सबको मिले प्रेम- शान्ति (का) मुकाम
2/202
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
शेष कल
द्वितीय
अध्याय बोध समाप्त
जय हो कृष्णा
----

No comments:
Post a Comment