Sunday, 25 February 2018

48--आज का गीता जीवन पथ



षष्ठम अध्याय 
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश  के अर्द्धसैनिक बलों एवं पुलिस के नाम,जिनकी सेवाओ से हम प्रेरित व सुरक्षित हैं)

 विपरीत इसी के योगी हैं,
इन्द जीत बन जीवन जीते,
मन भी रहता सदा नियन्त्रित,
 ईश-रस वो पीते रहते
6/651
जब जब पैर पड़े सन्तन के,
 पावन पवित्र धरा बने ,
जीवन का मर्म समझते वो ,
परिष्कृत जीवन होता शनै:शनै:
6/652
साफ स्वच्छ वस्त्र बिछैं,
कुशा बढ़ाती भूमि का मान
सहयोग ध्यान कराता आसन
                     ना नीचा,  ना हीं ऊंचा हो स्थान ,
6/653

विराजमान रहते  आसन पे,
इंद्रजीत व चित्त भी वश में
एकाग्र चित्त रहते कायम
मगन रहें योगाभ्यास में
6/654
परहित जीवन सदा बीतता
होते योगी म हान यहां
अन्त:करण भी शुद्ध होता,
                        स्वरूप बदलता अपना जहां
6/655
दिशा न देखें बार-2,
                       दृष्टि जमाते नाक पर ,
काया ,सिर ,गला एक समान
बाकी रखता ताक पर
6/656
स्थिर रहता योगी वो ,
काया रहती अचल
शान्त स्व -भाव से योग करे
रहती दूर स़ारी हलचल
6/657
बृह्मचर्य का व्रत रखे ,
भय भी डिगा नहीं सके,
 अन्तःकरण है शान्त उसका,
 ना लोभ भी उसको हिला सके
6/658
सावधान रहता है योगी ,
माया की है चंचलता ,
‘शान्त भाव से मुझमें लीन ,
 केवल मुझमें  व्याकुलता’
6/659
मन पे जिसका वश चलता ,
आत्मा का परमात्मा से मिलन ,
परमानन्द की पराकाष्ठा ,
उपकृत होता तनमन
6/660
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना राज)
शेष कल
यही प्रार्थना कृष्ना तुमसे ,
दुख दर्द कभी ना पास आये ,
दुनिया में शान्ति हो,
 प्रेम से जीवन कटता जाये
देश हमारा सोने की चिडिया,
साकार रूप फिर से पाये,
हर आफत विपदा दूर रहे
शक्ति इतनी फिर से आये

 (अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा

No comments:

Post a Comment

गीता जीवन पथ: 117----- आज का गीता जीवन पथ

गीता जीवन पथ: 117----- आज का गीता जीवन पथ : 18वां अध्याय  *Chapter 18* _Let Go, Lets move to union with God_ जय श्री कृष्णा. सबका भल...