18वां अध्याय
*Chapter 18*
_Let Go, Lets move to union with
God_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(1 8 वां अध्याय समर्पित है सभी शिक्षकों के नाम; जिनकी मेहनत से देश-विदेश में बच्चों का जीवन न केवल ज्ञानवान व समृद्धशाली बनता है बल्कि स्वयं को मोमबत्ती की तरह जला कर देश- विदेश में उजाला करते हैं , जिनके लिए समाज कृतज्ञ रहता है अतः हम सबको और भी परिश्रम कर देश का नाम रोशन करना चाहिए. गीता पाठ से स्पष्ट है कि जीवन में ;अंत में कुछ भी नहीं)
सबका भला हो !
(1 8 वां अध्याय समर्पित है सभी शिक्षकों के नाम; जिनकी मेहनत से देश-विदेश में बच्चों का जीवन न केवल ज्ञानवान व समृद्धशाली बनता है बल्कि स्वयं को मोमबत्ती की तरह जला कर देश- विदेश में उजाला करते हैं , जिनके लिए समाज कृतज्ञ रहता है अतः हम सबको और भी परिश्रम कर देश का नाम रोशन करना चाहिए. गीता पाठ से स्पष्ट है कि जीवन में ;अंत में कुछ भी नहीं)
सात्विक,, राजस, तामस,
भेद त्याग में कायम
यज्ञ, दान , तप रूप -कर्म
पाता जीवन( इनसे) नया आयाम
18/1397
परमतत्व में लीन है जीवन
माध्यम जिनके तप यज्ञ दान
विद्युत जन मर्म को जाने
इनसे करते अपना कल्याण
18/1398
साधन है साध्य को जाने
सात्विक वृत्ति इनकी होती
आसक्त विहीन जब होते हैं
त्याग का कारण बनती
18/1399
कर्म ,काम और निषिद्ध
नियत कर्म तो करने पड़ते
करना त्याग है श्रेष्श्य -कर (expected)
मोह ममता का कारण बनते
18/1400
त्याग न इनका आवश्यक
जीवन का आधार है
इन कर्मों की माया है
जीवन पाता विस्तार है
18/1401
त्याग तो उनका तामस है
कर्मों से पाता जो क्लेष
शरीर को देते जो कष्ट
त्याग करें ;ना रखें अबशेष
18/1402
जाने समझे ऐसा वो
राजस् त्याग है ,हम कहते
फल भी रहता उनसे दूर
प्रयास पाने की वो करते
18/1403
शास्त्र विहित कर्म जो करता
आसक्ति भावना दिल में रखता
सात्विक त्याग है उनका ,
फल इच्छा ना मन में रखता
18/1404
अर्जुन, इस संसार में
कुछ लोग होते बड़े अजीब
बुरे कर्म से नफरत ना
नहीं मानते अपना नसीब
18/11405
अच्छे कर्म है आसक्ति ना
बड़ी सरलता से भी लेते
सात्विक रहता धर्म भी उनका
सांस भी राहत की लेते
18/1406
शक की गुंजाइश ना
सर्वोपरि है त्याग कामना
फल आधा या पूर्ण रहे
फर्क नहीं ;चुप रहे या करें सामना
18/1407 मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
(God is omnipotent, omniscient and
omnipresent)
शेष कल

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