Thursday, 28 June 2018

107---आज का गीता जीवन पथ



18वां अध्याय 

*Chapter 18*
_Let Go, Lets move to union with God_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(1 8 वां अध्याय समर्पित है सभी शिक्षकों के नाम;  जिनकी मेहनत से देश-विदेश में बच्चों का जीवन न केवल ज्ञानवान व समृद्धशाली बनता है बल्कि स्वयं को मोमबत्ती की तरह जला कर देश- विदेश में उजाला करते हैं , जिनके लिए समाज कृतज्ञ रहता है अतः हम सबको और भी परिश्रम कर देश  का नाम रोशन करना चाहिए. गीता पाठ से स्पष्ट है कि जीवन में ;अंत में कुछ भी नहीं)

 भ्रम भी कुछ ने पाल रखा
करता आत्मा को माने
जो भी मन में आता करता
 सच ना अज्ञानी जाने
18/1417
बुद्धि होती उसकी अल्प
अल्प ज्ञान ने  उसको मोहा
भगवत कर्म ,उपासना
 बुद्धि को है इस ने संजोया
18/1418
ज्ञान जरूरी मिले सत्संग
जीवन का अर्थ समझ में आया
जीवन जिस ने जिया है शुद्ध
प्रभाव उसी ने हमपे जमाया
18/1419
कर्म ,प्रेरणा तीन है
ज्ञाता ,ज्ञान और ज्ञेय
 करता करण और क्रिया
करता संग्रह इन्हें संजोय
18/1420
गणों की संख्या शास्त्र करें
इनके गुण भी होते तीन
सुन आगे का वर्णन तू
इन विन होते गुणा-विहीन
18/1421
अर्जुन सारा भ्रम दूर करो
तू ज्ञान पिपासा अपनी  बुझा
ज्ञान ,कर्म ,कर्ता का अंतर जान
तू अपने प्रश्न का उत्तर पा
18/1422
परमतत्व भी प्रथक -2 है
ऐसा लगता हमको अर्जुन
ज्ञान भेद करे न कोई
एक ही लगता सबको अर्जुन
18/1423
समभाव दिलों में जिसने पाला
विभाग रहित देखता ज्ञानी
प्रथक प्रथक सबको लगता
सात्विक ज्ञान से महिमा  जानी
18/1424
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा

 (God is omnipotent, omniscient and omnipresent)


शेष कल

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