Sunday, 29 April 2018
गीता जीवन पथ: 69--आज का गीता जीवन पथ
गीता जीवन पथ: 69--आज का गीता जीवन पथ: ग्यारवाँ अध्याय जय श्री कृष्णा . सबका भला हो ! ( समर्पित है देश JUDICIARY के नाम ; HONBLE COURTS AND ADVOCATES ;...
69--आज का गीता जीवन पथ
ग्यारवाँ अध्याय
जय श्री कृष्णा.
जय श्री कृष्णा.
सबका
भला
हो
!
(समर्पित है देश JUDICIARY
के नाम ;HONBLE
COURTS AND ADVOCATES ;उनकी महनत व परिश्रम के प्रतिफल न
केवल हम सुरक्षित व RULE OF LAW कायम है ,हम जिनकी सेवाओ से प्रेरित व गौरवान्वित होते हैं)
जैसे नदी समाती सागर अन्दर
वेग से चलती खो जाती
आनी -जानी दुनिया है
तुझमे समाती ,खो जाती
11/967
जलता दीपक देख पतिंगा
वेग से आता, जल जाता
हाल वही जन जन का
देखा दौडता जाता, तुझमें समाता
11/968
काल रूप तेरा बड़ा निराला
फर्क नहीं कौन है रहता
सुख दुख के भंवर है जैसा
तुझमें जीता ,तुझमें मरता
11/969
नहीं जानता ,नहीं समझता
आ दि पुरूष !तुम समझ से बाहर
कैसे तुमको जानें हम
उठता मन में मेरे बवंडर
11/970
“रूप से तेरे मैं अपरिचित,
दिल से मेरी विनती सुन,
प्रभु! प्रसन्न रहो तुम हम सब पर
कैसे जीवन बीते तेरे बिन?”
11/971
“महाकाल मैं प्रलय हूं ,अर्जुन ,
नाशवान ये तेरा जहां ,
देख सभी को दिल से तू ,
नहीं बचेगा कोई यहां
11/972
लाखों जन और योद्धा दिखते ,
क्रम बंधा है सबको जाना ,
राह देखते अपनी बारी,
सत्य यही! सबने माना,
11/973
त्याग मोह को अर्जुन तू
गांधीद्व उठा तू युद्ध कर
मेरे द्वारा मृत्यु प्राप्त हैं सब
निमित्त मानव, तू युद्ध कर
11/974
इंतजार में मृत्यु का
पल-पल कtते बढ़ते हैं
आज सुनहरा पल है
वर्णन प्रतिदिन करते हैं
11/975
शत्रु नाश तुमको करना
इंतजार में जीत है तेरे
राज्य सुख तुझे भोगना
उपहार हाथ में अब तेरे
11/976
चहु दिशा में नाम तेरा है
विजय प्रणव करने वाली
असत्य हटे जग में अब
विजय श्री तुमको मिलने वाली
11/977
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल
Tuesday, 24 April 2018
68----आज का गीता जीवन पथ
गीता जीवन पथ: गीता जीवन पथ: 67----आज का गीता जीवन पथ: गीता जीवन पथ: 67----आज का गीता जीवन पथ : ग्यारवाँ अध्याय जय श्री कृष्णा . सबका भला हो ! ( समर्पित है देश JUDICIARY के नाम...
68--आज का गीता जीवन पथ
ग्यारवाँ अध्याय
जय श्री कृष्णा.
जय श्री कृष्णा.
सबका
भला
हो
!
(समर्पित है देश JUDICIARY के नाम ;HONBLE COURTS AND ADVOCATES ;उनकी महनत व परिश्रम
के प्रतिफल न केवल हम सुरक्षित व RULE OF LAW कायम है
,हम जिनकी सेवाओ से प्रेरित व गौरवान्वित होते हैं)
मैं देख रहा हूं ,प्रभो
आदि अन्त और मध्य रहित
अनन्त भुजायें सूर्य /चन्द्र नेत्र समान
ताकतवर अनन्त सामर्थ्य सहित
11/956
जग है संतप्त तुमसे सारा
तुमसे सभी व्याप्त दिशायें
आकाश भी तुम; अलौकिक-शक्ति
तुमसे पूर्ण सभी आशायें
11/957
पूर्ण हो तुम ,सर्वशक्तिमान
पृगट जहां में चारों ओर
सूर्य समान है प्रकाश तेरा
रूप भंयकर करता शोर
11/958
बड़ा अनोखा रूप देख ,प्रभु
अचम्भित सभी , दिल न हटता,
हाथ जोड़ खड़े हैं सारे
शृद्धा से है जग जपता
11/959
सभी देवता करें प्रवेश ,प्रभो
नाम जपें, गुण-उच्चारण करते
कल्याण करो जगत का ,प्रभो,
रिषी मुनि हैं दुआ मांगते
11/960
स्तोत्र स्तुति ,मन्त्र जपें,
दिन और रात भजन भी करते
मुझे रिझाते ,गीत भी गाते ,
मन की बात भी ,मुझसे कहते
11/961
ग्यारह रूद्र ,बारह आदित्य,
आठ वसु व साध्य गण ,विश्व देव,
मरूद गण, अश्वनी कुमार
दर्शन भी देते हैं देव
11/962
राक्षस ,सिद्ध, यक्ष ,गन्धर्व
मैं देखूं सारे पितर ,प्रभु
आश्चर्य मुझे होता है !
बृहमान्ड समाया इतर ,प्रभु
11/963
व्याकुलता बढ़ती है ,पृभो
मैं भी व्याकुल ,जन भी आकुल
रूप तेरा बड़ा भयंकर !
होते हैं जन सारे व्याकुल
11/964
नेत्र ,मुंह, बाहें ,उदर हजार,
जंघा पैर भी कई दिखते
दाढ़े तेरी बड़ी भयंकर
भयभीत सभी को हैं करते
11/965
रूप तेरा बड़ा भयंकर
देख के डर लगता है
देदीप्यमान ,अनन्त रंग अनोखे ,
प्रकाश देख डर लगता है
11/966
दिन और रात भजन भी करते
मुझे रिझाते ,गीत भी गाते ,
मन की बात भी ,मुझसे कहते
11/961
ग्यारह रूद्र ,बारह आदित्य,
आठ वसु व साध्य गण ,विश्व देव,
मरूद गण, अश्वनी कुमार
दर्शन भी देते हैं देव
11/962
राक्षस ,सिद्ध, यक्ष ,गन्धर्व
मैं देखूं सारे पितर ,प्रभु
आश्चर्य मुझे होता है !
बृहमान्ड समाया इतर ,प्रभु
11/963
व्याकुलता बढ़ती है ,पृभो
मैं भी व्याकुल ,जन भी आकुल
रूप तेरा बड़ा भयंकर !
होते हैं जन सारे व्याकुल
11/964
नेत्र ,मुंह, बाहें ,उदर हजार,
जंघा पैर भी कई दिखते
दाढ़े तेरी बड़ी भयंकर
भयभीत सभी को हैं करते
11/965
रूप तेरा बड़ा भयंकर
देख के डर लगता है
देदीप्यमान ,अनन्त रंग अनोखे ,
प्रकाश देख डर लगता है
11/966
परम अक्षर
परम योग्य
आदि धर्म के रक्षक तुम हो
अविनाशी पुरूष सनातन
रक्षक धर्म सनातन तुम हो
11/955
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल
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18वां अध्याय *Chapter 18* _Let Go, Lets move to union with God_ जय श्री कृष्णा . सबका भला हो ! ( 1 8 वां अध...
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