Wednesday, 27 December 2017

गीता जीवन पथ: आज का गीता पाठ-25

गीता जीवन पथ: आज का गीता पाठ-25: जन-2 की समझ / पहुँच से दूर , मूर्ख बनते हंसी का पात्र , थोथी बातों में जीते जीवन , बनता नियम उनका मात्र 2/...

आज का गीता पाठ-25



जन-2 की समझ /पहुँच से दूर ,
मूर्ख बनते हंसी का पात्र ,
थोथी बातों में जीते जीवन,
बनता नियम उनका मात्र
2/200
(ञृणी कृष्णा के ;जीवन -मरते ,
शब्द बने माध्यम हमसे ,
भला हो सबका ,
यही रहे दुआ दिल से ,
2/201
कृपा बरसे माधव की ,
सब के काम बने सुबह -साम,
हंसी खुशी से गुजरे जिन्दगी
सबको मिले प्रेम- शान्ति (का) मुकाम
2/202
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)
शेष कल

द्वितीय अध्याय बोध समाप्त
जय हो कृष्णा

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गीता जीवन पथ: आज का गीता पाठ-24

गीता जीवन पथ: आज का गीता पाठ-24: “ मन के हारे हार है , मन के जीते जीत ,”(Taken from outside) मन विचलित है उनका जो विषयों में रखते प्रीत I I2...

आज का गीता पाठ-24


मन के हारे हार है ,

मन के जीते जीत,”(Taken from outside)
मन विचलित है उनका
जो विषयों में रखते प्रीत
I I2/190
अन्तःकरण भावना शून्य ,
शान्ति कभी ना मिलती ,
सदा लालसा रहती मन में
सुख की घड़ियां कभी ना चलती ,
I2/191
जल में चलती नाव ,
पतवारों को रोके वेग,
प्रभाव ऐसा इनिद्रयों का ,
हर लेती ही हैं बुद्धिवेग
I2/192
स्थिर बुद्धि उसी की है ,
काबिज कभी नहीं होती,
मन को केन्द्रित करें ,
प्रभु भक्ति में ले जाती ,
1 I2/193
सुख संसारिक पाने की होड़ ,
नाशवान समझते जन ,
दिन रात खुशी में बीते,
यही चाहते जन-मन
I2/194
योगी का ध्यान वहाँ ,
जो परम तत्व का साधन हो ,
सुख है रात्रि समान जिन्है ,
नहीं किसी का बन्धन हो,
I2/195
नदी का मिलन ,
जब सागर से हो जाता है ,
नदी विलीन होगी उसमें,
सागर ना विचलित होता है
I2/196
परमशान्ति आलिंगन करती,
योग करे ना कोई विकार ,
परमतत्व में विलीन हो तो,
करती बुद्धि इस को नकार
I2/197
त्याग -कामना ,तमन्ना -रहित ,
ममता ,,अहंकार रहित ,
परम शान्ति आलिंगन करती ,
रहे सर्वदा विकार रहित 
I2/198
ब्रह्म में स्थित पुरुष वही
योगी कभी ना मोहित होता ,
ब्रह्म स्थिति सदा सामने ,
ब्रह्मानन्द को प्राप्त होता ,
I2/199
ब्रह्मानन्द है परमानन्द ,
आनन्द की असीम सीमा 
जीते मरते जाना जिसने ,
मर्म जीवन का समझा उसने
I2/200
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना राज)

शेष कल


Monday, 25 December 2017

गीता जीवन पथ: 23----आज का गीता पाठ

गीता जीवन पथ: 23----आज का गीता पाठ:   इन्द्रियों से दूरी कुछ में ,   पूर्ण निर्वृत्त ना होती उनमें , आसक्ति जीवत रहती , प्रवृत्ति नहीं बदलती उनमें , ...

23----आज का गीता पाठ

 इन्द्रियों से दूरी कुछ में,
 पूर्ण निर्वृत्त ना होती उनमें ,
आसक्ति जीवत रहती ,
प्रवृत्ति नहीं बदलती उनमें ,
2/181
स्थितप्रज्ञ पुरुष को देखो ,
परम तत्व में आसक्ति है ,
परमपिता से होगा मिलन ,
निर्वृत्त करती आसक्ति है ,
2/182
 बलात पुरूष के मन को ,
आसक्ति में बढ़ते देखा ,
बुद्धिमान भी हारे इनसे ,
शिखर पे चढ़ते गिरते देखा ,
2/183
समाहितचित्त में साधक,
 इन्द्रियां बस में कर लेता, है
 ध्यान ज्ञान केन्द्रित उसमें
बुद्धि स्थिर कर लेता है
2/184
आसक्ति, विषय ,विषयान्तर,
 कामना पैदा करता चिन्तन ,
विध्न करे बर्दाश्त से बाहर ,
क्रोध तोड़ता तन मन
2/185
मूढ़ भाव देता है क्रोध ,
भ्रमित होती बुद्धि हमारी ,
ज्ञान शक्ति ,निर्णय क्षरण
क्रोध मिटाता शक्ति हमारी
2/186
बुद्धि नाश् मानव पतन ,
पशु समान बन जाता है ,
राग द्वेष आसक्ति में लीन,
 गर्त में व्यक्ति गिर जाता है ,
2/187
आधीन रखा जिसने इनको ,
राग द्वेष से प्रभाव नहीं ,
अन्तःकरण है साफ स्वच्छ ,
उनका कोईं जबाव नहीं
2/188
खिलता रहता अन्तःकरण,
फर्क नहीं दुख या विपदा,
ईश भक्ति में गहन लीन,
स्थिर रहता सदा सर्वदा
2/189
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससेक्या लेनाक्या देना I
कृपा बनाये रखनाकृष्णाशरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना  राज)



शेष कल

Sunday, 24 December 2017

गीता जीवन पथ: आज का गीता पाठ-22

गीता जीवन पथ: आज का गीता पाठ-22: आगे इसके सुनो , अर्जुन !, तरह तरह नियम अपवाद सुने , बुद्धि को भ्रमित करते , कुछ स्वयं को तारनहार बने  I I 2/170 सुन -2 के विच...

आज का गीता पाठ-22

आगे इसके सुनो ,अर्जुन !,

तरह तरह नियम अपवाद सुने,

बुद्धि को भ्रमित करते ,

कुछ स्वयं को तारनहार बने 

I I2/170

सुन-2 के विचलित बुद्धि ,

कब तक ऐसा सहते रहोगे?,

अचल व स्थिर होगी जब ,

परमतत्व को प्राप्त करोगे I

I I2/171
                        बुद्धि योग माध्यम तेरा,
 सत सदा करो सहन,
 संयोग तेरा सम्भव है!
 ईश्वर से जब होगा मिलन
I I2/172
 भ्रमित हुये अर्जुन ,थोड़ा,
 स्थिर बुद्धि समझ से परे ,
कैसे क्या लक्षण हैं !,
समझाओ इनको ,माधव मेरे,
I I2/173
                      जिज्ञासा मन में  देखी जब,
 अर्जुन पाला उत्तर की चाहत ,
माधव ने शुरू किया बताना ,
देखे अर्जुन पाते राहत ,
I I2/174
 मन हैं चंचल,मन हैं कोमल,
 फलेच्छा में जीता है ,
सन्तुष्टि  मिली,फलेच्छा गायब,
 स्थितप्रज्ञ वो हो जाता है,
I I2/175
फल से फर्क पडे ना  उसको,
जब जीवन में मिलता है ,
आत्मा इंशा काया में ,
सन्तुष्ट सदा वो रहता है
I I2/176
                      स्थिर बुद्धि उस मानव में ,
मन में उद्वेग नहीं दुख में,
 राग ,भय, क्रोध, रफूचक्कर ,
सर्वदा निस्पृह रहता सुख में ,
I I2/177
अनन्त कामना लेके जीता ,
स्नेह रहित मुशिकल से होता ,
फितरत जीवन की ऐसी है ,
पाने को हरदम रोता
1 I I2/178
                         स्थिर बुद्धि होती उसकी
शुभ अशुभ में फर्क पडे  नहीं
विषयों से वो दूर रहे,
 आगे इसके तर्क नहीं ,
I I2/179
समेटे अपने अंग -2,
सीख उसे कच्छप देता,
 इन्द्रियाँ रहे विषयों से दूर,
 वो वश में कर लेता ,
I I2/180
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससेक्या लेनाक्या देना I
कृपा बनाये रखनाकृष्णाशरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना  राज)



शेष कल

गीता जीवन पथ: 117----- आज का गीता जीवन पथ

गीता जीवन पथ: 117----- आज का गीता जीवन पथ : 18वां अध्याय  *Chapter 18* _Let Go, Lets move to union with God_ जय श्री कृष्णा. सबका भल...