Monday, 19 March 2018

गीता जीवन पथ: 54--आज का गीता जीवन पथ

गीता जीवन पथ: 53--आज का गीता जीवन पथ: सप्तम अध्याय जय श्री कृष्णा. सबका भला हो ! (समर्पित है देश  के सभी प्रशासनिक अधिका रिओं के नाम;  सरहद परसेना ,घर में इनका कार्य व व्य...

गीता जीवन पथ: 54--आज का गीता जीवन पथ

गीता जीवन पथ: 53--आज का गीता जीवन पथ: सप्तम अध्याय जय श्री कृष्णा. सबका भला हो ! (समर्पित है देश  के सभी प्रशासनिक अधिका रिओं के नाम;  सरहद परसेना ,घर में इनका कार्य व व्य...

53--आज का गीता जीवन पथ


सप्तम अध्याय
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश  के सभी प्रशासनिक अधिका रिओं के नाम;  सरहद परसेना ,घर में इनका कार्य व व्यवहार,जिनकी सेवाओ से हम प्रेरित व सुरक्षित हैं)

साथ में रहती योग -माया
प्रत्यक्ष दर्शन हैं मुशिकल
अपना जैसा समझें जन
रहस्य समझना है मुशिकल
7/756
हे !पार्थ !क्या हुआ, क्या होगा ?
क्या होने वाला है?
सब कुछ मैं जानू
 कौन किसका रखवाला है ?
7/757

तरस आता  हैं मुझको ,
कुछ भक्त मेरे अज्ञानी
लीन भी मुझ में रहते हैं ,
भक्ति भी मन में ठानी?
7/758
श्रद्धा नहीं है मन में
पाखण्ड से ना काम बने
 दिन भर पूजा में व्यस्त
 इससे क्या काम बने ?
7/759
संसार की माया में मोहित
सुख दुःख में उलक्ष गये
ईर्ष्या ,द्वेष ,लालच
 मिल के इनमें खो गये
7/760
खो जाना संसार में ,
सो जाने जैसा है
समय बीतता जाता है
सब कुछ खोने जैसा है
7/761
मूल्यवान भाव ,निष्काम, श्रेष्ठ आचरण
श्रद्धा से भजते हैं जो ,
द्धन्द ,द्वेष ना फर्क पड़े
सच में रमते मुझमें वो,
7/762
मरना जीना मुझसे जोड़ा,
 मुक्ति का माध्यम बनता मैं
धर्म अध्यात्म के ज्ञानी वो
बनता माध्यम उनका मैं
7/763
परम बृहम कों प्राप्त करें,
 ये दृढ़ निश्चय है उनका
यत्न प्रयत्न श्रद्धायुक्त
भक्ति का कायल मैं उनका
7/764
अधिभूत ,अधिदेव ,अधि यज्ञ सहित ,
समझें मुझ को अन्तकाल में ,
चित्त युक्त जाने सब वे ,
मुझमें मिलते वे अन्त काल में
7/765
सदा लीन वे रहते हैं
जीवन का रहस्य समझ चुके,
 कारण यही उद्धार करें
परम तत्व को समझ चुके
7/766
अध्याय समाप्त
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
अध्याय समाप्त

Sunday, 18 March 2018

52-आज का गीता जीवन पथ



सप्तम अध्याय 
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश  के सभी प्रशासनिक अधिका रिओं के नाम;  सरहद परसेना ,घर में इनका कार्य व्यवहार,जिनकी सेवाओ से हम प्रेरित व सुरक्षित हैं)

उसका जीवन वशीभूत है
नाना कामना साथ में जीवित
मुझसे दूर सदा रहता है
समझो ,पार्थ !यही हकीकत
7/746
चाहत भक्त के मन में जो
पूजन जिसका करता है
शान्ति जिससे उसको मिलती
 भाव वही वह रखता है
7/747
भक्त बड़ा ;भगवान है,पार्थ!,
 भगवान समझते ,भक्त की महिमा
नहीं मुरादे रहें अधूरी
भगवान समझते भक्त की गरिमा
7/748
रूप बदलता घर संसार
पल पल चाहत भी बदलें
जैसा रूप भक्ति भाव हो
उसी में पूरा करने आते
7/749
भक्त मेरे कुछ ऐसे हैं
भक्ति में खोये रहते
भक्ति भाव में मुझसे जुडते
भक्ति में वो कहते रहते
7/750
मोहित होता जीवन में
खुशी मनाता,जीवन पाता
पागल बनता ,संग्रह करता
धन्य स्वयं को कहलाता
7/751
ज्ञानवान से क्या लेना
मांगे वो जो नाश वान
कृपा चाहते,खुशी मांगते
जग में खोया है इंशान
7/752
 जैसा मेरा रूप देखता
बना देवता भजता है
मेरा भक्त मुझे प्राप्त
 अन्त में मुझसे मिलता है
7/753
अनुत्तय, अविनाशी, परम भाव
 समझ से परे है जन मानुष
 अपना जैसा मुझे मानते
समझे गुणों में श्रेष्ठ ये मानुष
7/754
 श्रेष्ठ समझते हैं सब
अपना जैसा मुझे मानते
ना समझें वे योग की माया
 मरना जीना मेरा मानते
7/755
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा


Friday, 16 March 2018

51-आज का गीता जीवन पथ




षष्ठम अध्याय 
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश  के अर्द्धसैनिक बलों एवं पुलिस के नाम,जिनकी सेवाओ से हम प्रेरित व सुरक्षित हैं)

पार्थ !सम है योगी सब भूतों में ,
सुख दुख में भी रहता सम
परम श्रेष्ठ वो योगी धरा पे
बने ना स्थित उनकी विषम
6/691
मन है चंचल ,मधुसूदन !,
समभाव नहीं रहता है
चंचलता है इतनी ज्यादा
 स्थिति नित्य बदलता है
6/692
चलायमान मन है चंचल ,
स्वभाव बदलता रहता है,
 वश में करना ;वायु रोकना
दुष्कर इसको जग कहता है
6/693
                      सच है अर्जुन , तेरा कहना
 मन है चंचल, चलता रहता है
 अभ्यास करो,वैराग्य भी आता
जीव के वश में रहता है
6/694
दृढ़, बलवान ,नेक, इरादे
संकल्प करो,मन को काबू
दिशा ना बदलो बार-2
सीमित होती इसकी खुशबू
6/695
मैं भी तुम्हें बताता ,पार्थ!,
 मन पे जिसकी नहीं लगाम
योग दुष्प्राप्य है उसको
कर ले चाहे प्रयत्न तमाम
6/696
मन को वश में जिसने किया,
 जीवन में अदभुत कर डाला
सब कुछ प्राप्त करे सहज
योग भी हाथ गले में डाला
6/697
प्रेक्षा की अर्जुन ने फिर ,
श्रद्धालू ,सयमी नहीं पुरुष
भटक गया है योग से दूर
ऐसा जीव  भी !कौन स्वरूप?
6/698
                        धरा पे केवल तुम हो ,माधव!
 जो मेरा संशय तोड़ सके
नहीं दूसरा दुनिया में
मन को मेरे जान सके
6/699
नाश नहीं होता जग में
परलोक सुधर जाता है
आत्मों -द्वार किया जिसने
परम तत्व से मिल जाता है
7/700
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना राज)
शेष कल
यही प्रार्थना कृष्ना तुमसे ,
दुख दर्द कभी ना पास आये ,
दुनिया में शान्ति हो,
 प्रेम से जीवन कटता जाये
देश हमारा सोने की चिडिया,
साकार रूप फिर से पाये,
हर आफत विपदा दूर रहे
शक्ति इतनी फिर से आये
 (अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा


गीता जीवन पथ: 117----- आज का गीता जीवन पथ

गीता जीवन पथ: 117----- आज का गीता जीवन पथ : 18वां अध्याय  *Chapter 18* _Let Go, Lets move to union with God_ जय श्री कृष्णा. सबका भल...