ग्यारवाँ अध्याय
जय श्री कृष्णा.
जय श्री कृष्णा.
सबका
भला
हो
!
(समर्पित है देश JUDICIARY
के नाम ;HONBLE
COURTS AND ADVOCATES ;उनकी महनत व परिश्रम के प्रतिफल न
केवल हम सुरक्षित व RULE OF LAW कायम है ,हम जिनकी सेवाओ से प्रेरित व गौरवान्वित होते हैं)
जैसे नदी समाती सागर अन्दर
वेग से चलती खो जाती
आनी -जानी दुनिया है
तुझमे समाती ,खो जाती
11/967
जलता दीपक देख पतिंगा
वेग से आता, जल जाता
हाल वही जन जन का
देखा दौडता जाता, तुझमें समाता
11/968
काल रूप तेरा बड़ा निराला
फर्क नहीं कौन है रहता
सुख दुख के भंवर है जैसा
तुझमें जीता ,तुझमें मरता
11/969
नहीं जानता ,नहीं समझता
आ दि पुरूष !तुम समझ से बाहर
कैसे तुमको जानें हम
उठता मन में मेरे बवंडर
11/970
“रूप से तेरे मैं अपरिचित,
दिल से मेरी विनती सुन,
प्रभु! प्रसन्न रहो तुम हम सब पर
कैसे जीवन बीते तेरे बिन?”
11/971
“महाकाल मैं प्रलय हूं ,अर्जुन ,
नाशवान ये तेरा जहां ,
देख सभी को दिल से तू ,
नहीं बचेगा कोई यहां
11/972
लाखों जन और योद्धा दिखते ,
क्रम बंधा है सबको जाना ,
राह देखते अपनी बारी,
सत्य यही! सबने माना,
11/973
त्याग मोह को अर्जुन तू
गांधीद्व उठा तू युद्ध कर
मेरे द्वारा मृत्यु प्राप्त हैं सब
निमित्त मानव, तू युद्ध कर
11/974
इंतजार में मृत्यु का
पल-पल कtते बढ़ते हैं
आज सुनहरा पल है
वर्णन प्रतिदिन करते हैं
11/975
शत्रु नाश तुमको करना
इंतजार में जीत है तेरे
राज्य सुख तुझे भोगना
उपहार हाथ में अब तेरे
11/976
चहु दिशा में नाम तेरा है
विजय प्रणव करने वाली
असत्य हटे जग में अब
विजय श्री तुमको मिलने वाली
11/977
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल

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