18वां अध्याय
*Chapter 18*
_Let Go, Lets move to union with
God_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(1 8 वां अध्याय समर्पित है सभी शिक्षकों
के नाम; जिनकी मेहनत से देश-विदेश में बच्चों का जीवन न केवल
ज्ञानवान व समृद्धशाली बनता है बल्कि स्वयं को मोमबत्ती की तरह जला कर देश- विदेश में
उजाला करते हैं , जिनके लिए समाज कृतज्ञ रहता है अतः हम सबको और भी परिश्रम कर देश का नाम रोशन करना चाहिए. गीता पाठ से स्पष्ट है
कि जीवन में ;अंत में कुछ भी नहीं)
“संयास त्याग में अंतर क्या?
“अर्जुन बोले ,हे महावाहो!
समझ में मेरी आता ना
हे वासुदेव !तुम बतलाओ ’’
1389
“हर इंसा की मनसा होती
पत्नी-पुत्र जहान मिले
रोग आदि संकट से दूर
खिलता उपवन उन का
चले
18/1390
फुलवारी भी बढ़ती जाए
चीजों का ना रहे अभाव
घर में धन के हों भंडार
जीवन बीते जैसे ख्वाब
18/1391
यज्ञ ,दान ,तप और उपासना
वशीभूत इच्छा के करते
काम्य कर्म इनको कहते
त्याग ; इन्हीं का kuchh करते
18/1392
सबको यही बताया
विद्युत जन ने माना है
फलेच्छा मन में धावे
अर्थ यही ;अब तक जाना है
18/1393
मतभेद दुनिया में कायम
दोषयुक्त हैं कर्म यहां
त्याग इन्हीं का करना है
जीवन होगा सफल यहां
18/1394
यज्ञ ,दान ,तप ,रूप -कर्म
ज्ञानी यही धारणा रखते
त्याग इन का करना है
बिरत वे इन से रहते ”
18/1395
अर्जुन को भ्रम पैदा हुआ
कृष्णा भापें बोल उठे
निश्चित अर्थ को अब जानो
बोल उठे ,वह बैठे बैठे
18/1396
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
(God is omnipotent, omniscient and
omnipresent)
शेष कल

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