एक बार पुनः हिन्दी गीता पाठ साथ करते हैं जयश्री कृष्णा सबका भला हो सभी अपने लक्ष्य को प्राप्त करें यही कामना मेरी तुमसे
“जब भी देश / समाज मे समस्या आती हैं तब कहीं न समाज गुरुजनो के उपर निर्भर हो जाता है, तभी तो दोष भी गुरुजनो को मिल् ता है, बात भी सही हैं जिस दिन गुरुजी ने चाह लिया, देश व समाज की तसबीर व तक़्द्दीर बदल जायेगी I-------सहमत------०२ गुरु जनो काउदाहरण आपके सामने है------गुरुद्रोणाचार्य--पांडव व कौरवॊ के गुरुजन---शिक्षा ऐसी दी, :
महाभारत करा दिया—high class education—convent based------------गुरु संदीपन---- कृष्णा व सुदामा के गुरुजन--- शिक्षा ऐसी दी ----to all like our primary and govt
and aided/recognized schools--राजा ने मित्र के लिये राज् ही छोड़ दिया ””
हमस़ब शिक्षक(formal or informal.as we teach everday ) हैं
हमस़ब शिक्षक(formal or informal.as we teach everday ) हैं
आंओ कृष्णा सें सीखें -----
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“ पैदल चलती सेना,
घुड़सवार थे चहुँ ओर I
रथो पे बैठे महायोद्धा,
बढ़ते हाथी मचाते शोर II1II
घुड़सवार थे चहुँ ओर I
रथो पे बैठे महायोद्धा,
बढ़ते हाथी मचाते शोर II1II
भयाक्रान्त थे लोग सभी
बैठा-2 दिल भी था I
कल क्या होंगा ;सोच सभी,
दुःखी्-2 सा मिल् ता था II2II
बैठा-2 दिल भी था I
कल क्या होंगा ;सोच सभी,
दुःखी्-2 सा मिल् ता था II2II
द्रश्य विहग़म ? शोर अजीब ?
लहू की प्यासी सेना थी I
दो इंच जमीं की खातिर,
आमने ,सामने सेना थीII3II
लहू की प्यासी सेना थी I
दो इंच जमीं की खातिर,
आमने ,सामने सेना थीII3II
विश्वास ,भरोसा सत्य ,न्याय
दाब पे लगे, सभी सुकर्म I
ताज मिलेगा इनको,
या विजयी होaगे सभी कुकर्म II4II
दाब पे लगे, सभी सुकर्म I
ताज मिलेगा इनको,
या विजयी होaगे सभी कुकर्म II4II
ताल मेल असम्भव है,
सत्य झूठ के बीच की खाई I
कटती लाशों को देखा,
सदियों से ये चली लड़ाईII5II
सत्य झूठ के बीच की खाई I
कटती लाशों को देखा,
सदियों से ये चली लड़ाईII5II
आज दौर ये फिर आया,
अंहकार ने साथ दिया,I
झूठ ने ठोका दावा अपना ,
जड़े सभी की हिला दिया II6II
अंहकार ने साथ दिया,I
झूठ ने ठोका दावा अपना ,
जड़े सभी की हिला दिया II6II
एक तरफ़ दुर्योधन, दुःशासन
सेना उनकी विशाल ,श्रेष्ठ I
अश्वथामा ,कर्ण सरीखे,
सङ्ग थे पितामह कुल ज्येष्ठ II7II
सेना उनकी विशाल ,श्रेष्ठ I
अश्वथामा ,कर्ण सरीखे,
सङ्ग थे पितामह कुल ज्येष्ठ II7II
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
शेष कल

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