आज का गीता पाठ
सभी समझते है इसको ,
युयुत्सु (CRAZY FOR WAR)दुर्योधन है मजबूरी,
साथ चाहते हैं सब ,
पर पैदा की इस ने दूरी
2/74
मन करता हैं और दिल चाहता ,
प्यार से मसले सुलझाएँ,
परिणाम हाथ से दूर हमारे ,
क्या होगा? हम क्या पाएँ ?
2/75
पुत्र प्रेम में डूबे इतने,
धृतराष्ट्र तुम्हारे अपने ,
जिन हाथों ने बचपन सींचा ,
टूट. गये अब सारे सपने
2/75
चिन्तित हैं वे भी ,!
परिणाम अदेंशा ,भय लाता ,
अर्जुन! तेरी ताकत के आगे,
घबराहट से दिल बैठा जाता
2/76
पुत्र मोह में इतनी लाचारी,
क्या दुनिया की कमजोरी ?
सभी विरासत चाहते हैं ,
सदा बढ़े ये तेरी मेरी
2/77
शाकुनि बन के अधर्म ,
घर में चुपके से आया,
सत्य न्याय की हरेक चाल पे ,
परचम अपना लहराया
2/78
सभी जानते सभी समझते ,
नुकसान केवल अपना होना,
पता नहीं क्या मजबूरी
सोना अपने हाथ से खोना
2/79
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)

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