Sunday, 19 November 2017

4---आज का गीता पाठ-4

झूठ हार जाता हर दम
जीत सत्य की सदा रही,
सदियों से हम सुनते आये
यही दास्तां सबने कही
I22I

माधव ही जाने  व्यथा मेरी
अर्जुन कहते बार -2,
“मुझे यहाँ से जाने दो,
होने दो सपने तार-तार”
I23I

विचलित देख राजन को
संजय ने समझाया
“वक्तअभी है राजन
युद्ध बचालो सबने यही बताया
(24)

वक्त -2 की बात है
इन्तजार न करता है
पछतावा रह जाता है
वक्त बीतता जाता
(25)

चन्द घड़ीका मेला है
धरा नहीं है बस में हमारे
पल दो पल की कहानी है
शनैः छोड़ते देखें सारे
(26)

आज का मातम उनके है
कल हमारे घर आयेगा
नियम शाश्वत धरा के हैं
डिगा ना कोई पायेगा
(27)

इतिहास बने साक्षी
प्यार मोहब्बत का तोहफा
त्याग, तपस्या का महान उदाहरण
लोग कहें ,तुमने सौंपा
(28)

मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)
शेष कल 

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