आज का गीता पाठ
बात सभी, राजन की माने
सम्मान आपका सब करते
जिस पल चाह लिया तुमने
स्वत:समाधान हमको मिलते
(29)
बात मेरे दिल की है
“ठीक कहा संजय तुमने
देर हो गई अब तो !
क्या -2प्रयास नहीं किया हमने
(30)
तातश्री ,कृश्ना ने भी प्रयास किये
क्या तुमने नहीं देखा ?
सभी व्यर्थ ही निकले हैं
दुर्योधन ने खींची रेखा
(31)
जिद्दी युवराज है वो
महान योद्धा है वो
जीत सोचता, जीत है लाता
यही दिखाया उसने सबको
(32)
जो होना है होता है !
क्या विधि का विधान नहीं ?
जो होता है होने दो !
क्या नहीं मानते हम सभी ?
(33)
सुनने को मैं आतुर
आगे का हाल सुनाओ !
क्या हुआ अभी तक ?
अभी हमको बतलाओ (34)”
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
शेष कल
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
शेष कल

No comments:
Post a Comment