Tuesday, 21 November 2017

6----आज का गीता पाठ

ठीक है राजन ;

“दोनों सेना है तैयार
आमने सामने महा योद्धा है
अभी युद्ध शुरू होना है
 तैयार सभी योद्धा है
35
ये युद्ध भूमि है ,ये कुरूक्षेत्र है
योद्धा जुटते लड़ने को
जो जीता वही सिकंदर!
वरना सब हैं मिटने को
36
इनकी गुस्सा इनकी फितरत!
इक दूजे के जानी दुश्मन
नफरत की ज्वाला जलती है
दहक उठा है इनका तनमन
37
युद्ध शुरु अब होना है
ना जाने किसकी बारी है
चन्द घड़ी का मेला है
होना तय ;मारामारी है
38
सोचकर मैं घबराता हूं
ना जाने क्या भाग्य हमारे ?
अपने ही अपनों के दुश्मन !
खो देगें हम अपने प्यारे”
39
दुख मुझको भी होता है संजय
पर वक्त साथ ना देता है
हठी है दुर्योधन ,मैं भी जानूं
वो वचन कटु भी कहता है
40
क्या होगा भगवन
काश आजमें देख भी पाता
अंधियारा छायामेरे लिए
सोच यही दिल रोता है
41


अध्याय बोध समाप्त
जय हो कृष्णा

मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)




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