अर्जुन का भ्रम था , ये
या मोह में भूल गया सब,
घेरे से बाहर सोच न जाये
“ अब, अर्जुन ! जानोगे तुम कब”
2/91
तत्व के मर्म जानो,
चिरस्थायी नहीं होता
करो कल्पना वक्त की
क्या देखा न ; अपनों को रोता
2/92
वक्त - वक्त की बात है
ये इन्तजार नहीं करता ,
फेरी वाला डेरा है ये न,
त्याग सभी ये बढ़ता रहता
2/93
कितने आये और चले गये,
अब भी जाने को तैयार
क्रम में खड़े सभी है,
बस बारी का है इन्तजार
2/94
याद रखो अर्जुन ! तुम,
करू ना करू में समझो फर्क,
निर्णय लेना सीखो तुम,
फालतू के न रखो तर्क
I2/95
सीमा पे प्रहरी जगता है
और जन सारे सोते हैं
स्वयं झेलता दिक्कत वो
हंसते -हंसते सबरहते हैं
I2/96
निर्णय में चूक नहीं उन के,
दुश्मन उनसे थर्राता है,
तैयार है हरदम वो
दुश्मन उनसे घबराता है,
I2/97
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
शेष कल

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