र्निविकार मेरा जैसा बन जाओ,
जिसमें दुनिया तेरी समाय ,
सशंय को स्थान नही , (सबकुछ जिसमें तेरा हो )
सुख दुख एक समान ही जाय
I2/121
दुर्योधन जैसा बन जाओ ,
लड़ता उस को रस मिलता ,
सही गलत को जाने वो ,
पर झूठ गलत में आनन्द पाता
I2/122
क्या उसके अपने रण क्षेत्र नहीं आये ?,
इन्तजार करता ;युद्ध शुरू होना ,
जीत मिलेगी राज करेगा ,
किस के िलए, क्यों रोना?
I2/123
मानव हो तुम !पार्थ,
सेतु बन के सम्बन्ध निभाते ,
मन का संशय: युद्ध करो
या भाग क्यों नहीं जाते?
I I2/124
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
शेष कल

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