Tuesday, 19 December 2017

17---आज का गीता पाठ




(आत्मा का वर्णन)

असत वस्तु की सत्ता ना,
सत का अभाव  नहीं रहता,
ज्ञानवान वे लोग यहाँ ,
मर्म तत्व मन में रहता
I I2/125

नाश रहित तू उसको जान,
जगत की माया जिनसे है ,
उस अविनाशी की माया है ,
सब कुछ रहता उनसे हैI
I I2/126

नाशवान जगत है मिथ्या ,
आते ,जाते क्रम चलता,
कौन सदा यहां रहता है ?,
सब तो पल -2 मिटता रहता
I I2/127

अजर, अमर, अविनाशी ,आत्मा ,
भूल करे, जो समझे मरता ,
ना ये मरता, ना ही मारता ,
रूप बदलता, चलता रहताI
I I2/128

अजन्मा ,नित्यपुरातन, सनातन,
अदभुत ,अजीब, गजब कहानी ,
मौत रहती कौसों दूर,
रहस्य भरी बस यही कहानी
I I2/129

वस्त्र पुराना हो जाता,
नये को हम सब धाते हैं,
आत्मा त्यागे. मृत शरीर ,
नवजीवन हम पाते हैंI
I I2/130

पानी पे तलवार चलाना ,
पानी को काट नहीं सके ,
शस्त्रों से ! परे आत्मा ,
आग इसे जला सकेI
I I2/131

जल की गलन से दूर ,
वायु सुखा नहीं सकती ,
अच्छेद्य, अदाह्य ,अक्लेद्य ,अशोष्य ,
नित्य अचल स्थिर रहती
I I2/132

अव्यक्त ,अचिन्त्य, विकार-रहित ,
जीवन इसका सोच से परे ,
शोक के काबिल नहीं आत्मा ,
कहीं. कभी ना ये मरे I
I I2/133

लेती जन्म या मृत्यु प्राप्य,
क्रम इसका चलता रहता,
शोक के योग्य नहीं आत्मा.,
जीवन इसका सदा ही रहता I
I I2/134

 

जन्म मिला है जिसको ,
मृत्यु मिलन होना निशिचत,
मृत्यु मिली है जिसको ,
जीवन मिलना उसका निशिचत I
I I2/135
जन्म से पहले नहीं प्रगट,
मृत्यु अप्रगट कर देती है ,
जीवन रहता प्रगट यहां ,
आश्चर्य दिलों में भर देती हैI
I I2/136
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससेक्या लेनाक्या देना I
कृपा बनाये रखनाकृष्णाशरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना  राज)

शेष कल


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