Friday, 26 January 2018

33----आज का गीता पाठ


जब -2 धर्म की होगी हानि,
 स्वयं को रचता इसे बचाने ,
साकार रूप मेरा होता है ,
कर्म करू ;मैं इसे बचाने
4/481
अधर्म की वृद्धि जब होती है ,
 हाहाकार मच जाता है
इसे रोकना कर्म है उत्तम,
 संकट विहीन सब हो जाता है
4/481
ज्ञो सोता उसे जगाता मैं,
 करतव्य निभा ,तू आगे बढ़ ,
धर्म की रक्षा तुमको करनी ,
त्याग भय ;तू अधर्म पे चढ
4/482
जन्म-जन्मान्तर का नाता है ,
अाना जाना नहीं रुकेगा
सतों (good people)का उद्धार; भला हो
 क्रम चलना ; ये सदा रहेगा
4/483
धर्म स्थापना युगे-2
 पावन पुनीत कर्म है मेरा,
 अधर्म हारता हर पल देखो
ये साथ ना देता तेरा मेरा
4/484
धर्म की रक्षा, अर्जुन !,
देख ! उठो ,युंद्ध कर 
वन सबका प्रेणता तू ,
भय को त्यागो ,युद्ध कर
4/485
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
शेष कल

(अर्चना राज)

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