Sunday, 28 January 2018

34----आज का गीता पाठ


चतुर्थ अध्याय 
जय श्री कृष्णा
(समर्पित है देश के वीर जवानों के नाम)

धर्म की रक्षा ,
दुष्ट का अन्त ,
भय मुक्त रहे ,
धरा पे सन्त(good people)”
4/486
प्रभु स्वभाव रहता है सम,
तत्व ज्ञान को समझा जो ,
प्रभु से जान विलीन उन्हीं में
जीवन मुक्तिपाया है वो
4/487
राग द्वेष भय क्रोधको त्याग ,
स्थित हुए जो मुझमें जन,
ज्ञानमार्ग से सिद्धि मिली
 विलीन हुए वो मुझ में जन
4/488
मार्ग अनुकरण करते मेरा ,
मालूम होता जुदा-2,
 जो जेसा करता ,पाता है ,
दिलसे भजता मुझको सदा
4/489
Note--(They also serve the God ,
who stand and wait,even John Milton
stresses the same thing)
भीख मांगते पूजन करते,
 धरा पे होता ये हर दिन हर पल ,
सिद्धि मिले कर्मों से उनको,
 भरें देव कर्मों के फल
4/490
Note--(Basically we all are beggars in
 one or the other way)
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
शेष कल

(अर्चना राज)


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