चतुर्थ अध्याय
जय श्री कृष्णा.
(समर्पित है देश के वीर जवानों के नाम)
Note---------बृहम तत्व, प्राप्ति
हेतु
1----सांख्य योग completely
related to gain through Gyan (true knowledge)----i.e.—mental refinement and
Krishna is at his best here -2------ योग is related to the performance of Kerma
and it is followed by what we think in mind and for the refinement of the
soul……….We …the common men are expected to do both of them time to time
,otherwise life shall be difficult to survive…….
परमबृहम को प्राप्त करें
,
ये जीवन होता अनुभव अनूठा
,
मूर्ख सदा ही दूर रहे ,
नाटक करते झूठा झूठा
4/532
धरा पे रहते है वे ,
झूठ बोलते मूर्ख बनाते,
सच्चे सुख से दूर हैं वे,
षड़यन्त्रों की दुनिया रचते
4/533
यज्ञ सनातन की अविरल धारा
,
समझ ले इनका तू विस्तार,
इन्द्रीय, शरीर, मन बना माध्यम ,
अनुष्ठान करो, न करों विचार,
4/534
तत्व ज्ञान को समझो ,पार्थ!,
परमबृह्म से यही मिलाता
,
मुक्ति मिलती कर्मबंधन से
,
हटते बंधन मोक्ष दिलाता
4/535
हे परनतप,अर्जुन इसी जहां
में,
ज्ञान यज्ञ है सबसे उत्तम ,
सबका स्रोत यहां है ,
अन्त आदि का है उदगम
4/536
तत्व दर्शी (ज्ञानी) इस
जहाँ में ,
सरल स्वभाव रहता है उनका
,
प्रणाम करो;सानिध्य मिले
,
चक्षु खुले तन मन का
4/537
सेवा से जीवन बनता है ,
सरल स्वभाव से सब मिलता
,
प्रेम से समझो बृह्मतत्व
को,
जीवन में पुन्य सदा मिलता
4/538
जिस दिन समझ लेगा, तू ,अर्जुन
!,
भूत भविष्य तेरे वश में होगा ,
मोह माया से दूर रहेगा,
लालायित (ब्रह्म तत्व को)
तू होगा
4/539
ज्ञान चक्षु खुलेंगें जिस
दिन ,
बुद्धिमान बढ़ के होगा तू,
इस नैय्या से पार करेगा ,
भवसागर से तर जायेगा तू
4/540
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
शेष कल

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