Wednesday, 14 February 2018

42--आज का गीता जीवन पथ


पंचम अध्याय 
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश के वैज्ञानिकों के नाम जो असमय मौत का शिकार बने)

कर्म योगी होता है.
वो आसक्ति ;न पटके पैर
न तेरा है न मेरा है
ना ही ममता ,ना ही वैर
5/576
मोह ,ममता ,बुद्धि से दूर ,
मन ,बुद्धि ,समता ,शरीर
शुद्ध करे अन्तरमन को
परहित धरा पे उसका शरीर
5/577
सकाम पुरूष की दुनिया है
कर्मफल की चाह जिसे
(पर) योगी रहे परमबृहम मे लीन
कर्मों के फल का त्याग उसे
5/578
                             शांति चाहता है योगी,
कठिन मार्ग अपनाता है,
परम तत्व से मिलन लक्ष्य है,
धन सर्वोत्तम यही मानता है
5/579
नव -द्वारों का घर है, सुन्दर
आसक्ति बढ़ाता ,मन हरसाता
सकाम पुरूष ने माना सब कुछ ,
जीवन ज्योति सदा जलाता
5/580
योगी को ये सुन्दर घर,
महत्वहीन ही लगता है
रहता इसमें समय काटता,
लीन बृहम में रहता है
5/581
उपयोग करें उसका ऐसे ,
सबकर्मों का दिल से त्याग,
हर्ष मिले या कष्ट उठायें ,
फर्क नहीं जो आये भाग
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निरा निपट निरक्षर हम ,
हर पल रहते स्वार्थ में लिप्त ,
जीवन के भ्रम में जीते ,
कभी ना होते हम सन्तुष्ट
5/583
प्रभु दिये पूर्ण आजादी,
कर्त्ता दिखते इस जगत में ,
जैसा हम करते रहते
फल भी मिलते इस जगत में
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कर्म के कर्त्ता हम
कर्मों की राह चुनते है
स्वभाव भी बनता कर्मों से
फलेच्छा में रहते हैं
5/585
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना राज)
शेष कल
यही प्रार्थना कृष्ना तुमसे ,
दुख दर्द कभी ना पास आये ,
दुनिया में शान्ति हो,
 प्रेम से जीवन कटता जाये
देश हमारा सोने की चिडिया,
साकार रूप फिर से पाये,
हर आफत विपदा दूर रहे
शक्ति इतनी फिर से आये
 (अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा


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