Saturday, 17 February 2018

43----आज का गीता जीवन पथ


पंचम अध्याय 
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश के वैज्ञानिकों के नाम जो असमय मौत का शिकार बने)

ज्ञान चक्षु खोल के जिसने,
परम तत्व को जान लिया,
जीवन सफल किया उसने ,
छिपे रहस्य को जान लिया
5/596
आने वाला पल भी ,
जाने वाला है
क्रम रहेगा जारी ,
कभी न रूकने वाला है
5/597
अल्प वक्त है अपने पास,
प्रेम ,कर्म ,सहयोग करें,
इन हाथों से हो भला ,
दर्द सभी का दूर करें
5/598
काल संक्रमण आता है
शोषित होते हम
कौन जहां का शख्स यहां ,
न देखे जिसने अपने गम
5/599
जो ज्ञान मिला हमको,
हम भी करें प्रसारित
तम को दूर हटायें दिल से ,
खुशी करें हम भी रोपित
5/600
                              आने जाने का क्रम ,
सदियों से चलता  रहता है
वक्त बदलने की ताकत ,
कौन यहां पे रखता है
5/601
ज्ञानी योगी पुरूष यहां
उपाय ढूंढते रहते हैं
आने जाने से छूट मिले
यही मार्ग अपनाते हैं
5/602
जो मनुष्य करता है !
कर्मों का भागी बनता है
फल जो भी मिलता हो
स्वीकार -स्वभाव वह रखता है
5/603
कर्मों की इस दुनिया में
ईश्वर भागी नहीं बनता है
पाप कर्म या शुभ कर्म
फर्क उसे नहीं पड़ता है
5/604
अज्ञान ढ़का ज्ञान को
मोहित सबको करता
परम तत्व से दूरी बढ़ाता
ज्ञान से मोहभंग कराता
5/605
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II

(अर्चना राज)
शेष कल
यही प्रार्थना कृष्ना तुमसे ,
दुख दर्द कभी ना पास आये ,
दुनिया में शान्ति हो,
 प्रेम से जीवन कटता जाये
देश हमारा सोने की चिडिया,
साकार रूप फिर से पाये,
हर आफत विपदा दूर रहे
शक्ति इतनी फिर से आये
 (अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा



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