पंचम अध्याय
जय श्री कृष्णा.
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश के वैज्ञानिकों के नाम जो असमय मौत का शिकार
बने)
ज्ञानवान बनते हैं जब,
ज्ञानचक्षु खुल जाते हैं ,
अज्ञान हटता जाता है
अनुभूति अनोखी पाते हैं,
5/606
सूर्य समान आलोंकित करता ,
प्रकाश पुञ्ज को फैलाता,
सूर्य समान नूर चमके ,
ज्ञान वो सच्चा पाता
5/607
मन में बृह्म,
कर्म में बृह्म
भजता बृह्म ,
तिष्ठति बृह्म
5/608
स्थिति जिसकी निष्ठा बृह्म
पाप रहित वो हो जाता
अपना वृत्ति वह प्राप्ति करे
लीन बृह्म में (वो) हो जाता
5/609
ज्ञानी ऐसे समदर्शी
सच्चे बृाह्मण कह लाते
गौ,हाथी कुत्ता, मानव
समान स्वभाव वे अपनाते
5/610
मन में स्थिति समभाव ,
भेदभाव वे ना करते
सभी को माने एक समान
व्यवहार सभी से वे करते
5/611
(सभी को माने एक समान –Equality amongst all is
stressed here ,whereas in the name of caste and creed ,all evils have been
imposed .This is the twisting and playing with the facts or interpolation ,more
particularly by the Britishers like William Hunter, St.Francis, Will-Du Wrath,
Grifith and Macaulay etc.)
जीते जी संसार को जीता
सबके साथ एक समान
मन भी दूषित न हो
वही तो ज्ञानी बने महान
5/612
दाग नहीं ईश्वर में
बदनाम कभी ना वे करे
निद्रोष्
,सम,वो तटस्थ
हस्तक्षेप न कभी करे
5/613
मनुष्य कर्मों का दास
अच्छे को सदा वो धाता
पीठ थपथपाता अपनी वो
स्वयं को महान जताता
5/614
अच्छे बुरे ,कैसे भी कर्म ?,
नाम मेरा वो लेता है
बदनाम करें परम तत्व !,
कर्म स्वय वो करता है,
5/615
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
शेष कल
यही प्रार्थना कृष्ना तुमसे
,
दुख दर्द कभी ना पास आये
,
दुनिया में शान्ति हो,
प्रेम से जीवन कटता जाये
देश हमारा सोने की चिडिया,
साकार रूप फिर से पाये,
हर आफत विपदा दूर रहे
शक्ति इतनी फिर से आये
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा

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