Monday, 19 February 2018

45--आज का गीता जीवन पथ


पंचम अध्याय 
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश के वैज्ञानिकों के नाम जो असमय मौत का शिकार बने

स्थिर बुद्धि ,संशय रहित बृह्म बेत्ता !,
प्रिय भी प्राप्त करे ?,हर्षित ना वो होता
अप्रिय भी उसके कर्म लिखा ,
विचलित कभी ना वो होता
5/616
वही समझता परमानन्द !,
बाह्य जगत ना दे सकता,
लीन स्वयं को करता वो,
बृहम तत्व में सब मिलता
5/617
अन्त:करण विशुद्ध रहे ,
ध्यानयोग में मगन रहे
परमतत्व से मिलने का फल!
सबसे दुलर्भ? श्रेष्ठ रहे
5/618
                          विषयी पुरुष सुख को
परिभाषित करते अपने हिसाब
नहीं समझते दुःख का कारण
विषयों में देखें ,ढ्ढें अपने जबाव
5/619
पार्थ !समझना इनको ,?गम्भीर बनो
ज्ञानी जाने क्या हकीकत?,
परम तत्व का आनन्द मिले
इससे बड़ी क्या जरूरत ?
6/620
जन्म सफल होता है
साधक होता द्ृढ़ प्रबल
काम ,क्रोध के वेग को रोके
क्षमता उसकी अखण्ड प्रबल
6/621
स्व- इच्छा शरीर त्याग की,
मन में योगी रख ता है
हंसते -2सुखी -जीवन त्यागे
असली सुख समझता
6/622
अनन्त सुख देता जीवन,
रमण इसी में करता है,
ज्ञानवान वो आत्मा से ,
जग को आलोकित करता है
6/623
Note ----A real story----Debraha Baba whose ashram I have visited too is the live example, He took Jal-samadhi (leaving Human body by sinking oneself till death ).My maternal uncle ,who served as Police Inspector told me that he too visited him ,and before him, he saw a lady requesting him for a boy-child ,But Baba refused it,She requested again and again and Baba said,"You have to pay for that" She agreed ,she had one girl child. The moment she left his ashram within 30 minutes ,people saw her coming back weeping and crying, Her car met with an accident ,and her only girl child was no more ,as she diedin the accident,Then he replied,” I already refused you,But what this is destined ,Now go you shall be blessed with a child soon..”....Such great soul lived here and surprisingly  we believe in the Epicurean theory .-eat,drink and be marry and forget the great tradition received ;left  by such saints )

परमबृह्म में लीन पुरुष
सांख्य योगी फल पाता निशिचत
 भाव एकाकी सदा वो रखते
सदालीन वो रहता निशिचत
6/624
जीवन में बस एक उपलब्धि !
परमबृहम परमात्मा से हो मिलन
कामक्रोध चित्त जो जीता
जीवन उसका ; ज्ञान प्रयास और ध्यान
6/625

मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना राज)
शेष कल
यही प्रार्थना कृष्ना तुमसे ,
दुख दर्द कभी ना पास आये ,
दुनिया में शान्ति हो,
 प्रेम से जीवन कटता जाये
देश हमारा सोने की चिडिया,
साकार रूप फिर से पाये,
हर आफत विपदा दूर रहे
शक्ति इतनी फिर से आये
 (अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा

No comments:

Post a Comment

गीता जीवन पथ: 117----- आज का गीता जीवन पथ

गीता जीवन पथ: 117----- आज का गीता जीवन पथ : 18वां अध्याय  *Chapter 18* _Let Go, Lets move to union with God_ जय श्री कृष्णा. सबका भल...