Tuesday, 20 February 2018

46--आज का गीता जीवन पथ

पंचम अध्याय
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश के वैज्ञानिकों के नाम जो असमय मौत का शिकार बने
 लगे कर्म उसे पुनीता
मन ना दूषित हो उसका
स्वयं भला ,स्वयं से भला
जीवन मार्ग दिखाता उसका
6/626
मन ना जिसका भटके,
 विषय भोग ना बाधित करते
 निकाल फेंक बाहर देता
बृह्म का सदा वे चिन्तन करते
6/627
दृष्टि केद्रित भृकुटी मध्य,
 प्राण वायु रहे अधीन,
अपान वायु भी सम रखते
जिनका अपना सर्वाधीन
6/628
 जीता जिनने मन,बद्धि ,
इच्छा, भय, क्रोध, से मुक्ति पाया
भजता परमबृह्म दिन रात
मोक्ष परायण :मुनि वो कहलाया
6/629
 मेरा भक्त वही होता ,
सब य ज्ञ तपों को भोगे
निस्‍वार्थ ,दयालु, प्रेमी, वो
परहित में सब वे त्यागे
5/630
लीन रहें मुझमें हरदम ,
आत्मा भी हो निच्छल ,
शान्ति ,सदा वो पायेगा
परमानन्द मिलेगा हर पल
5/631
भेदभाव ,मनभेद नहीं
साफ स्वच्छ है चित्व उसका
सेवा से खुशियाँ मिलती
 रोग शोक से मुक्त वो रहता
5/632
पंचम अध्याय समाप्त
मेरी विनती

सभी मनोरथ पूरे  हों
जो साथ चले है मेरे साथ
दुख दर्द की सीमा से उ्पर
तू कृपा का रखना अपना हाथ
कृपा तेरी काफी है
प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा
गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते
कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना
बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा



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