Friday, 23 February 2018

47--आज का गीता जीवन पथ


षष्ठम अध्याय 
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश  के अर्द्धसैनिक बलों एवं पुलिस के नाम,जिनकी सेवाओ से हम प्रेरित व सुरक्षित हैं)
सन्यासी/योगी वही होता है
अनाश्रित होता कर्मफल से
कर्म की गंगा अविरल बहती
न व्याकुल होता कर्मफल से
6/633
खुशियां आती,सन्तुष्टि मिलती,
अंग्नि का भी त्याग करें ,
संन्यासी केवल वे ही नहीं
क्रियाओं का परित्याग करें,
6/634
पार्थ! संन्यासी बही होता है
योग की धारा उनसे बहती
त्याग अपेक्षित न बस में जिनके,
योगी दुनिया नहीं मानती
6/635
मननशील  इच्छा से युक्त
योगी बनना मन की चाह
निष्काम भाव से कर्म करें ,
ये सेतु बनती उनकी राह
6/636
योगी बनना राह पकड़ना,
संकल्पों का रहे अभाव ,
सेतु बनता कल्याण का मार्ग,
जीवन में आता कभी न ताव
6/637

योगारूठ पुरुष महान,
 भोग इन्द्रिओं का दूर रहे
कर्मों में होती अनासक्ति
 सकल्पों से भी दूर रहें
6/638
मनुष्य स्वयं है अपना मित्र ,
शत्रु स्वयं का भी रहता
उद्धार करे अपना स्वयं
भाव यही मन में रहता
6/639
 मित्र आत्मा का भी वो,
इन्द्रीय मनं को जीता जिसने ,
वही शत्रु बन जाता है ,
हार मान ली इनसे जिसने
6/640


                            आत्मा का होता मिलन ,
परमात्मा का होता वास ,
शान्त सदा रहता हैं वो
जो सदा रखे प्रभु की आस
6/642
मान सम्मान का फर्क नहीं,
 फर्क ना दुख के आने का
 हर्ष-विषाद से ऊपर जो
फर्क नहीं सुख के जाने का
6/643
ज्ञान मिला है जिनको ,
परम तत्व को जान लिया ,
तन मन सब केन्द्रित हैं ,
दिल से उसने मान लिया
6/644
अन्त:करण है विकार रहित,
ज्ञान-विज्ञान से तृप्त ,
इन्द्रजीत कहते हैं उनको,
जीवन में रहता सदा संतृप्त ,
6/645
मिटटी,पत्थर,स्वर्ण समान ,
कभी करें न वो अभिमान,
भगवत प्राप्त योगी है वो ,
सब कुछ धरा पे धूल समान
6/646
श्रेष्ठ पुरुष धरा का वो,
सह्दय ,मित्र,वैरी ,उदासीन मध्यस्थ ,
बन्धु ,धर्मात्मा ,पापी भी ,
करे ना उनके मन को ध्वस्त
6/647
जीवन का सार है जान लिया ,
दो घड़ी का मेला यहाँ,
वो पल आने वाला है
जहां भी बांधे जहाँ शमां
6/648
                       कल दो पल के गीत यहाँ,
पल दो पल संगीत गूंजते ,
पल दो पल की एक कहानी,
पल दो पल दिन रात बीतते
6/649
मानव का प्रभु मिलन ,
असान नहीं होता है ,
आशा इच्छा युक्त सदा ,
संग्रह वो करता रहता है
6/650
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना राज)
शेष कल
यही प्रार्थना कृष्ना तुमसे ,
दुख दर्द कभी ना पास आये ,
दुनिया में शान्ति हो,
 प्रेम से जीवन कटता जाये
देश हमारा सोने की चिडिया,
साकार रूप फिर से पाये,
हर आफत विपदा दूर रहे
शक्ति इतनी फिर से आये
 (अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा


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