षष्ठम अध्याय
जय श्री कृष्णा.
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश के अर्द्धसैनिक बलों एवं पुलिस के नाम,जिनकी सेवाओ से हम प्रेरित व सुरक्षित हैं)
जितेन्द्रिय बन जाता जो ,पार्थ!,
अति
सूक्ष्म बुद्धि को पाता है,
परिष्कृत
करता योग उसे,
खुला
रहस्य ! वो पाता है
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ये करना या वो करना,
ये छूटा या वो छूटा,
ये रूठा या वो रूठा ,
कभी किसी से सम्बन्ध टूटा
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इसे मना ओ, उसे मनाओ ,
ये है आधा ,वो अधूरा ,
सन्तोष कभी ना मिल पाता !,
यही मनुष्य का नाता गहरा
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जिसने पाया परमात्म सुख ,
सुख बाकी धूल-धसरित हुए,
इससे
बड़ी न कोई उपलब्धि ,
“जैसे प्रभु अबतरित हुए”
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देख प्रभु क्या मांगो ,पार्थ!,
सारी मांगे पूर्ण किये,
हाथ
पकड़ उठायें भगवन
बाकी सुख यहां क्षीण हुए
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सुख से फर्क नहीं पड़ता
दुख भारी भी क्षीण हुये
संसार संयोग से रहित योग
कर्तव्य बोध से पूर्ण हुये
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योग -कर्तव्य बोध संसार में जीना ,
उकताना बस बन्द करो
उमंग चले धैर्य के साथ ,
कर्म करो बस कर्म करो
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त्याग सभी वो कमजोरी
बस में करो कामना सारी
अभ्यास करो बस धीमें -2,
चले साधना तेरी प्यारी
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धीमें
-2 मुठ्ठी में ,पार्थ !,
सब कुछ आ जायेगा ,
चिन्तन होगा क्रेद्रित उसमें,
परमानन्द
गले लगायेगा
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चंचल मन की चंचलता,
रोक
सभी न इनको पायें ,
इधर को जाता ,उधर कूदता
भ्रम
से इसके उबर न पायें
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मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
शेष कल
यही प्रार्थना कृष्ना तुमसे
,
दुख दर्द कभी ना पास आये
,
दुनिया में शान्ति हो,
प्रेम से जीवन कटता जाये
देश हमारा सोने की चिडिया,
साकार रूप फिर से पाये,
हर आफत विपदा दूर रहे
शक्ति इतनी फिर से आये
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े
I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा

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