दश
म अध्याय
जय श्री कृष्णा.
जय श्री कृष्णा.
सबका
भला
हो
!
(समर्पित है देश के सब
खिलाड़ियों के नाम ;गर्मी, सर्दी
या बरसात ;उनकी महनत
व परिश्रम के प्रतिफल हमें
सम्मान मिलता है
हम,जिनकी सेवाओ से
प्रेरित व गौरवान्वित होते हैं)
वचन मेरा है रहस्य भरा ,
प्रभाव युक्त ये रहता है ,
दिल की इच्छा से कहना
हित का चिन्तन करता है
10/859
लीला मेरी समझ से बाहर
अपरम्पार ! सभी मानते हैं
भ्रमित जहां भी होता है
हैरान ! रिषी भी होते हैं
10/860
अर्जुन ! जितनी चाबी(तुझमें) भरी
है
उतना ही तू कर पाता है
वश में तेरे तेरा शरीर!
नहीं पूर्ण नियंत्रण पाता है
10/861
समझो खोल के दिल को तुम
लाख नाडियां दिल भी धड़के
स्वतःक्रिया भी होती है
बार-2 देखा हट के
10/862
आदि कारण में जगत का हूं
रहस्य भरा है जीवन मेरा
अजन्मा! अनादि !लोंकों में
यही सत्य रूप है मेरा
10/863
रहस्य को समझें जो कोई ,
ज्ञान पिपाशा उसकी बढ़ती
परम तत्व को जानें, समझें
यही लालसा दिल में होती
10/864
पापों से मुक्ति पाना
हर पल लीन वो रहता है
क्षणभंगुर जीवन का मर्म !
रहस्य जानता ,वही समझता है
10/865
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल

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