दश
म अध्याय
जय श्री कृष्णा.
जय श्री कृष्णा.
सबका
भला
हो
!
(समर्पित है देश के सब
खिलाड़ियों के नाम ;गर्मी, सर्दी
या बरसात ;उनकी महनत
व परिश्रम के प्रतिफल हमें
सम्मान मिलता है
हम,जिनकी सेवाओ से
प्रेरित व गौरवान्वित होते हैं)
सत्य ,संकल्प,क्षमा ,भय,डर
सुख- दुख ,उत्पत्ति ,प्रलय
सत्य ,अहिंसा, अपकीर्ति समता,
सुख- दुख ,उत्पत्ति ,प्रलय
सत्य ,अहिंसा, अपकीर्ति समता,
ज्ञान,दान ,यश , की लय
10/866
भाव उत्पन्न होते है मुझसे,
जानें ज्ञानी स्रोत इसका
जीव महज एक पुतला है
संचालित मुझसे जीवन उसका
10/867
महा ज्ञानी भी जगत में ,
जन्म लिया है समय -2
आये कर्म निभाया अपना
निहित है इसमें भी विस्मय
10/868
यह जगत अल्पकाल की माया
भेद जो इसका जान गया
भक्ति भाव में डूब गया
गहरा मुझमें (वो )समा गया
10/869
भजते हैं दिन रात यहां
मुझमें जगत समाया
भेद जानने को आतुर
यही निराली मेरी माया
10/870
दिन रात भक्ति में मेरी डूबे
जग है अल्प-काल का फेरा
भक्ति में शक्ति निहित है
जग है अल्पकाल का डे रा
10/871
चिन्तन रमण करें वे मुझमें
समझे मेरा वे प्रभाव
चर्चा होती दिन रात यहां
दिल से अर्पित करते भाव
10/872
जीवन जैविक मात्र नहीं है
अध्यात्म जुड़ा है इससे
जीव जन्तु जगत में हैं
मुकाम जोड़ते हैं मुझसे
10/873
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भाव उत्पन्न होते है मुझसे,
जानें ज्ञानी स्रोत इसका
जीव महज एक पुतला है
संचालित मुझसे जीवन उसका
10/867
महा ज्ञानी भी जगत में ,
जन्म लिया है समय -2
आये कर्म निभाया अपना
निहित है इसमें भी विस्मय
10/868
यह जगत अल्पकाल की माया
भेद जो इसका जान गया
भक्ति भाव में डूब गया
गहरा मुझमें (वो )समा गया
10/869
भजते हैं दिन रात यहां
मुझमें जगत समाया
भेद जानने को आतुर
यही निराली मेरी माया
10/870
दिन रात भक्ति में मेरी डूबे
जग है अल्प-काल का फेरा
भक्ति में शक्ति निहित है
जग है अल्पकाल का डे रा
10/871
चिन्तन रमण करें वे मुझमें
समझे मेरा वे प्रभाव
चर्चा होती दिन रात यहां
दिल से अर्पित करते भाव
10/872
जीवन जैविक मात्र नहीं है
अध्यात्म जुड़ा है इससे
जीव जन्तु जगत में हैं
मुकाम जोड़ते हैं मुझसे
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सारे मेरे अपने हैं बस ,
अज्ञान दिलों में बसता है
ज्ञान से दिल को भरता मैं
अज्ञान दिलों से हटता हैं
10/874
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल

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