Tuesday, 10 April 2018

62-आज का गीता जीवन पथ



दशम अध्याय 
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश  के सब खिलाड़ियों के नाम ;गर्मी, सर्दी या बरसात ;उनकी महनत व परिश्रम के प्रतिफल हमें सम्मान मिलता है हम,जिनकी सेवाओ से  प्रेरित व गौरवान्वित होते हैं)



संहार कभी मैं हूं , पार्थ
कभी उत्पत्ति का कारण मुझसे
स्त्री पुररुष विभूति मुझसे
समझ सके: तू समझ ले मुझसे
10/907
कीर्ति ,श्रीवाक, स्मृति, मेधा ,
धृति ,क्षमा ,गायत्री छन्दों में छन्द
 गायन हूं वृहत्साम ,माहों में मार्गशीर्ष
क्यों उलझे हो,अर्जुन !तेरे मन का दन्द्ध
10/908
वसन्त भी मैं हूं मौसम में ,
 स्वागत मेरा सारे करते
हल भी सारे मुझसे हैं
प्रभाव भी मेरा सभी समझते
10/909
विजय सोचोगे, विजय है मुझसे
 निश्चय स्थान ढूँढता मुझ से,
सात्विक का सात्विक भाव
हार जीत का निर्णय मुझसे
10/910
वृषनवंशी में मैं  वासुदेव !तेरा सखा
पाण्डवों में धनज्य ,अर्जुन!
 कवियों में वेदव्यास हूं
चाहत मेरी ,फैले अमन
10/911
शुक्राचार्य कवियों में
मुझसे बनती नीति
ज्ञानवान का तत्व हूं
मुझसे है सुमति /कुमति
10/912
 गुप्त जान भी मुझसे
जगत का जो है आ्धार
जग में जो भी देखो
सबसे जुड़ते मेंरे तार
10/913
अर्जुन सब भूतों का आधार
 मैं उत्पत्ति का कारन
चाहे चर हो, अचर
सबका कारन और निवारन
10/914

दिव्य विभूति का विस्तार ,
संक्षेप में हमें बताये ?
जिनका नहीं आदि, अन्त
उसको क्या समझाये !
10/915
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल

No comments:

Post a Comment

गीता जीवन पथ: 117----- आज का गीता जीवन पथ

गीता जीवन पथ: 117----- आज का गीता जीवन पथ : 18वां अध्याय  *Chapter 18* _Let Go, Lets move to union with God_ जय श्री कृष्णा. सबका भल...