Thursday, 19 April 2018

66--आज का गीता जीवन पथ





ग्यारवाँ अध्याय 
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश  JUDICIARY के नाम ;HONBLE COURTS AND ADVOCATES ;उनकी महनत व परिश्रम के प्रतिफल न केवल हम सुरक्षित व RULE OF LAW कायम है ,हम जिनकी सेवाओ से  प्रेरित व गौरवान्वित होते हैं)
“जीवन - मरण है परिवर्तन ,
इनसे क्यों डरना है ,?
सत्य ही सबकी मंजिल हो !
 सत्य की खातिर लड़ना है
11/933
झूठ भी आता सत्य दिखा के ,
कुछ दिन इसका राज भी चलता
ज्ञान मिले ,चाहत होती ,
झूठ कभी ना टिक पाता
11/934
अज्ञान मेरा अब दूर हुआ ,
गुरूत्व मिला मुझको तुमसे ,
वचन गोपनीय तुमने बोले
 (और)मर्म जीवन का समझा तुमसे
11/935
ज्ञान मिला उत्पत्ति कारण ,
प्रलय का ज्ञान दिया तुमने,
 अविनाशी ईश्वर कहते तुमको,
ना रूप अभी तक देखा हमने !
11/936
सही मानती दुनियां इसको ,
ईश्वर हो, परमेश्वर हो !,
बल ,वीर्य ,ऐश्वर्य तुम्हारा ,
कमल नेत्र तुम हृदयेश्वर हो !
11/937
रूप देखना दिल की इच्छा ,
दर्शन का मन अभिलाषी ,
प्रभु दिखाओ अपनी माया ,
अंखियां दर्शन को प्यासी
11/938
हे जगत के स्वामी !अर्न्तयामी !,
शक है मुझको ; तुमको लगता
तेज युक्त अनुपम तेरी माया,
 दिल से सबका संशय हटता”
11/939
 “ पार्थ! तेरे मन की शंका
 दूर अभी करता हूं मैं
 देख हजारों रूप मेरे
चर्चा जिनकी करता हूं मैं
11/940
नाना रूप रंग हैं मेरे
जगत समाया रूप में मेरे
अपनी इच्छा पूरी कर लो
बचे ना शंका दिल में तेरे
11/941
हे अर्जुन !इस जगत को
अब मुझ में देख तू
दिव्य अलौकिक रूप मैं देता
जी चाहे जी भर के देख तू!
11/942
गुणाकेश( निद्रा जीतने वाला) तुम हो ,पार्थ
देख जरा इस जहां को तू
बृह्माण्ड समाया मुझ में, पार्थ
 ज्ञान _पिपाशा (अपनी) अब बुझा ले तू”
11/943
मेरी विनती

कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा

शेष कल

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