Thursday, 3 May 2018

70---आज का गीता जीवन पथ



ग्यारवाँ अध्याय 
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश  JUDICIARY के नाम ;HONBLE COURTS AND ADVOCATES ;उनकी महनत व परिश्रम के प्रतिफल न केवल हम सुरक्षित व RULE OF LAW कायम है ,हम जिनकी सेवाओ से  प्रेरित व गौरवान्वित होते हैं)

पहले व्यक्ति दुनिया में तुम
रुप मेरा है तुमने देखा
नहीं अभी तक कोई जाना
 मेरा रूप भी है ऐसा
11/1002
चाहे जो कितना कर ले
ये रूप ना देख सकेगा वो
 तन मन चाहे कष्ट मिले
या कोई कर्म करें वो
11/1003
गरीब हो या धनवान
वेदों का चाहे पाठ करें
 गुप्त रूप है मेरा
नहीं मिलेगा ;चाहे कोई बात करें
11/1004
 तू ही पास रहा मेरे
 माया मेरी जान चुका है
पल भर की यह दुनिया है
मर्म इसका तू जान चुका है
11/1005
रूप तेरा विकराल है ,भगवन
व्याकुलता की बात नहीं
पूर्ण भाव भी ना होना
भ्रम की कोई भी बात नहीं
11/1006
परेशान ना हो पार्थ
एक बार बाद तू फिर से देख
 शंख चक्र गदा पद्म चतुर्भुज
रूप बार बार तू  मेरा देख
11/1007
“संजय बोले राजन ,
 रूप प्रभु ने फिर दिखाया
धीरज बांधा अर्जुन का
बाल समरूप है उसने दिखाया
11/1008
अर्जुन बोले रूप तेरा बड़ा भयानक
फैलाता बहलाता मानव रूप में मेरे
डर अंदर से अब जाता है
क्या दर्शन होते तेरे
11/1009
जगत की माया लीला तेरी ,
समझ चुका हूं बात  ये  तेरी
रूप तेरा जो जो देखा था
किस्मत खुल गई अब मेरी
11/1010
दुर्लभ दर्शन इसके हैं
लालायित भी रहते देव
ना मिलते दर्शन इसके हैं
मिल के चाहे सारे  देव
11/1011
ना कोई ऐसी विद्या जहां में
दान करो चाहे व्रत धारण
वेदपाठ गुणगान करो
यह नहीं उदाहरण साधारण
11/1012
भ्रमित है जग सारा पार्थ
ना ही चाहत ,ना ही फल भी उनका
मुकाम नहीं वह तो मुझको ही पाते हैं
अंतिम धाम यही सबका
11/1013
परम तत्व का मर्म है सबका
जिसने पहचान लिया है मुझको
कोशिश चाहे कितनी कर ले
शक न रहता  जग में उसको
11/1014
 मैं भी जानू बस
 प्यार मुझे भी करते हैं
रुप मेरा भी देखें
दिल से यही भावना रखते हैं
11/1015
दुनिया में है सारे जन
 भक्त भाव में डूबे हैं
मुझसे मिलना उनकी तपस्या
यही यही मार्ग वे ढूंढे हैं
11/1016
चाहे उनको कोई सता ले
फर्क नहीं पड़ता है उन पर
ना वे विचलित होते है
कृपा तेरी रहती है उन पर
11/1017
अपराधी या भला आदमी
एक तराजू में  तोले
 सरल राह भी अपनाते हैं
मीठी वाणी सब से बोलें
11/11018
हे जगत के स्वामी अंतर्यामी
हाथ जोड़ विनती तुझसे
मन भी घायल दिल भी व्याकुल
पीड़ा सहन करें अब कैसे
11/1019
मोह-ममता का त्याग करो,
काम तेरा हो उत्कृष्ट
धनुष उठा मानवता की खातिर ,
अधर्म न दे जाए किसी को कष्ट
11/1020
अध्याय समाप्त
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा



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