Saturday, 5 May 2018

71-आज का गीता जीवन पथ



बारहवां अध्याय 
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश की प्रैस  के नाम ;IV PILLAR; इतनी असुरक्षा और PRESSING SITUATIONS के मध्य उनकी महनत व परिश्रम के प्रतिफल न केवल हम जागररू्क और अप- टू-डेट रहते है ,हम उनकी सेवाओ से  प्रेरित व गौरवान्वित भी होते हैं)
संशय अर्जुन के दिल में ,
“साकार रूप भी तेरा है
भ्रमित करे जग में सबको
निराकार रूप भी तेरा है
12/1021
पूजा पाठ करें किसकी
मन को शान्ति कहाँ मिलती
 किस रूप को तेरा सच मानूं
मन में शंका मेरे ठती
12/1022
कौन उपासक सच्चा है ?
सच्ची जिसकी प्रीत जगत में
प्रियवर कौन जहां में हैं ?
भ्रम होता है इसी जगत में”
12/1023
“श्रद्धा जिसके मन में रहती
 याद करें दिन रात मुझे
सगुण मान के पूजे जो
योगी उत्तम मानूं उसे
12/1024
इन्द्रीय जिसके वश में है
राग द्वेष से ऊपर जो
हित सबका साधे दिल से
एकाकी भाव से जपते जो
12/1025
सर्वज्ञ सर्वव्याप्त सर्वशक्ति मानना
निराकार नित्य अचल अविनाशी
रू्प मेरा है मन में जिनके
न इच्छा करती विचलित जरा सी
12/1026
दिनरात मुझे भजते हैं.
सर्वोपरि इच्छा है उनकी
भक्त बड़ा भगवान से है
बात मैं करता उसन के मन की”
12/1027
 सब भूतों का हित साधे ,
पक्षपात ना जीवन उनका
प्राप्त होते हैं मुझको ही
 संशय नहीं किसी के मन का
12/1028
निराकार बृहमं में भी!,
आसक्त चित्त है जिनका
श्रृद्धा दिल में जिनके रहती
भक्ति भाव का मन हैं उनका
12/1029
दुःख मिलता है अव्यक्त विषयक
साधन मांगे कठोर श्रम
मिलन को आतुर वे रहते
 देह से करते कठोर-परिश्रम
12/1030
भक्त प्रिय है मुझको ,
दिन रात वे रहते मुझ में लीन
सब कर्मों का करें समर्पण
ना रहते सदकर्मों से हीन
12/1031
मृत्युलोक से जल्दी मैं
 उद्धार करूं मैं उनका
 मुक्त वे झंझावातों से
ल-2 ध्यान  रखूं मैं
उनका
12/1032
सुनो अब !अर्जुन ,तुम
मन बुद्धि से करो  निशिठ्ति
 मुझ में स्वयं को पाओगे
संदेह न करना तुम किंचित
12/1033
मन ना तेरा हो चंचल
 भक्ति-भाव से दूर ले जाता
 प्रश्न उठें मन में बहुतेरे
व्याकुल दिल को तेरे करता
12/1034
अभ्यास नियत होते हैं,
 सहज ना मिलता कुछ भी,
 भजन, ध्यान, योग ,समाधि,
 चिंतन ,सुनना ,मुझको भी
12/1035
संदेह के बादल छ्ट जायेगें ,
आलोकित होगा तेरा मन ,
प्रकाश पुन्ज स्वयं के जैसा,
 लाभान्वित होगा जन-मन
12/1036

मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा

 शेष कल
(God is omnipotent, omniscient and omnipresent)

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