Wednesday, 9 May 2018

75----आज का गीता जीवन पथ



तेरहवां अध्याय 
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(
समर्पित है देश engineers and technocrats के नाम ; इतना जोखिम और परेशानी  के मध्य अप नी महनत परिश्रम के प्रतिफल केवल अनगिनत प्रोजेक्ट्स को पूरर्ण करते   रहते है,बल्कि ,हम उनकी सेवाओ से प्रेरित गौरवान्वित भी होते हैं)
अर्जुन! ये तो तुम जानो ,
जैसा जहां का क्षेत्र ,
वैसा फल पाते ही
आसूं लाते तेरे नेत्र
13/1065
महनत भी रंग लाती है ,
नाम सा्थ में चलता है,
 यश भी देता साथ वहां ,
महनत का फल मिलता है
13/1066
यही हाल है रूप शरीरा ,
क्षेत्र ज्ञ  बन के ध्यान रखें ,
ज्ञानी महत्व समझता है,
 बातें ज्ञान की वो कहे
13/1069
अर्जुन !सब क्षेत्रों के क्षेत्र ज्ञ ,
जीवात्मा मुझको जान ,
विकार सहित पुरूष तत्व ,
समझो इसको , अब तुम जान
13/1070
क्षेत्र अच्छा बुरा हो ,
विकारों ने घेरा
क्या कारण इनका समझ ,
क्या हाथ किसी ने फेरा ?
13/1071
क्षेत्र ज्ञ का पृभाव ,
क्षेत्र ही उसे दिलाता ,
आगे का वर्णन सुन ,
मैं ही तुझे बताता
13/1072
स्तुति करते वेद-मन्त्र,
 नाना वर्णन का विस्तार
बृहमसूत्र में भी गणना !,
 करें कल्पना को साकार
13/1073
पंच महाभूत,दस इन्द्रीय ,
मन अपना एक है
शब्द ,स्पर्श ,रूप ,रस, गन्ध (इन्द्रीयwork )
सबकी भाषा एक है
13/1074
इच्छा सुख दुख,द्वेष भाव,
 धृत चेतना आनन्द
यही विकारों की जननी !
चखे जीव जैसे कन्द
13/1075
एकान्त प्रिय , दुष्ट जनों से दूर
आत्मज्ञान में नित्य स्थित,
 परम तत्व में लीन रहे
ज्ञान यही ;उसकी मनः स्थित:
13/1076
ज्ञान को समझो,ज्ञानको जानें,
 संसार रचा है ईश्वर
सब प्राणी का वही नियन्ता
पा्लक पोषक वह परमेश्वर!
13/1077
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल
(God is omnipotent, omniscient and omnipresent)

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