तेरहवां अध्याय
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश engineers and technocrats के नाम ; इतना जोखिम और परेशानी के मध्य अप नी महनत व परिश्रम के प्रतिफल न केवल अनगिनत प्रोजेक्ट्स को पूरर्ण करते रहते है,बल्कि ,हम उनकी सेवाओ से प्रेरित व गौरवान्वित भी होते हैं)
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश engineers and technocrats के नाम ; इतना जोखिम और परेशानी के मध्य अप नी महनत व परिश्रम के प्रतिफल न केवल अनगिनत प्रोजेक्ट्स को पूरर्ण करते रहते है,बल्कि ,हम उनकी सेवाओ से प्रेरित व गौरवान्वित भी होते हैं)
अज्ञानी
करते भेद भाव,
प्राणी
बाटें अपने हिसाब
समुदाव
में उनके जो शामिल
मित्रता उनसे ?यही जबाव
13/1078
क्या
सत है क्या असत ?
सोच
हमारी से वो दूर
परम
ब्रृह्म वह अनादिकाल है
प्रकाश
बिखेरे उसका नूर
13/1079
जब
जानोगे तब समझोगे ,पार्थ !
खुशी
से झोली भर जायेगी
परमानन्द
से आंलिगन करना
किस्मत
जब परिवर्तन लायेगी
13/1080
पत्ता चलता हिलता देख,
देखता जग की हलचल वो
सुनता है वो सबकी
हिसाब भी रखता पल-2 का वो
13/1081
लीला उसकी अपरम्पार ,
समझ सोच से सबकी दूर ,
समय बदलता चलता है ,
कभी ना फीका उसका नूर
13/1082
रूप अनेकों जग में देखें,
नाना प्रकार की रीति -रिवाज ,
इस नश्वर दुनिया में ,
रेत पे बंधते हैं सब साज
13/1083
अपनी इच्छा अपनी हवस ,
सिर पे जग के हावी,
बदनाम करे वो परम तत्व,
मानो हाथ में उसकी चाबी
13/1084
जगत रचियता दुनिया का ,
उससे बड़ा ना विज्ञानी,
ज्ञानी रहस्य की तह कों ढूंढ़ें
कोशिश सबकी आनी- जानी
13/1085
शून्य से बृहमाण्ड बना
ना इस से बडा कोई रहस्य ,
खोखला जगत है !,
इसे मानते सारे रहस्य
13/1086
सदियों से दुनिया करे प्रयास ,
समझ में थोड़ा ही आया,
लेश मात्र क्या ज्ञान मिला?,
फूला न इंसान समाया
13/1087
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल
(God
is omnipotent, omniscient and omnipresent)

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