तेरहवां अध्याय
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश engineers and technocrats के नाम ; इतना जोखिम और परेशानी के मध्य अप नी महनत व परिश्रम के प्रतिफल न केवल अनगिनत प्रोजेक्ट्स को पूरर्ण करते रहते है,बल्कि ,हम उनकी सेवाओ से प्रेरित व गौरवान्वित भी होते हैं)
जीवन मरण का खेल अजीब,
सृष्टि गति से चलती
क्या होगा आगे अब?
भनक किसी को ना मिलती
13/1088
दुष्ट दुराचारी हैं वो ,
खून की होली जिनको भाती ,
बदनाम करें ईश्वर को वो
शर्म जरा सी ना आती
13/1089
पल आ्ता है पल जाता है
कौन सा पल है तेरा अन्तिम,
लहू बहा
किसपे
हंसते
साथ छोड़ ने वाला है ; तेरा भी दम
13/1090
नियम शाश्वत जगत में
मानव बदल नहीं सकता
थोथी राजनीति है इसकी
और भेद जगत में है करता
13/1091
जगत में भेजता वो सबको
वही तो देता है सब को
अन्याय करे इंशा जग में
पर दोष भी देता है उसको
13/1092
झूठे ऐसे लोग यहां,
झूठी उनकी सोच रही
झूठे वचन
फरे
बी है
झूठी ऐसी बात कही----(खून की होली)
13/1093
स्वार्थ भरी है सोच ,
लालच दिल में वे रखते,
जियो और जीने दो,
बा्त प्रेम से कहने दो
13/1094
अध्याय समाप्त
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल
(God
is omnipotent, omniscient and omnipresent)

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