तेरहवां अध्याय
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश engineers and technocrats के नाम ; इतना जोखिम और परेशानी के मध्य अप नी महनत व परिश्रम के प्रतिफल न केवल अनगिनत प्रोजेक्ट्स को पूरर्ण करते रहते है,बल्कि ,हम उनकी सेवाओ से प्रेरित व गौरवान्वित भी होते हैं)
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश engineers and technocrats के नाम ; इतना जोखिम और परेशानी के मध्य अप नी महनत व परिश्रम के प्रतिफल न केवल अनगिनत प्रोजेक्ट्स को पूरर्ण करते रहते है,बल्कि ,हम उनकी सेवाओ से प्रेरित व गौरवान्वित भी होते हैं)
जीवन मरण का खेल अजीब,
अल्पकाल का डेरा है,
खुशी मिलेगी पलभर की ,
ये जग
ना
तेरा है ना मेरा है
13/1095
हस्तक्षेप ना वो करता है,
लोग राजनीति करते हैं ,
स्वार्थ और लालच की खातिर,
नित नये षडयन्त्र रचते हैं
13/1096
ईश्वर सबसे ऊपर है,
जगत को जिसने खूब रचा,
हक देता है सभी जीव-जन्तु को ,
यही सत्य है !दिल में बसा
13/1097
विकार विचार न मन में रहते ,
दोषों का भी रहे अभा्व ,
भोग ना उसको विचलित करते ,
ना जीवन देता कोई तनाव
13/1098
ना ही पुत्र
मोह
में फंसता,
ना ही किसी में आर्कषण ,
घर की ममता दूर करे
न सुख-दुख में कोई घर्षण
13/1099
प्रिय -अप्रिय का भेद नहीं ,
ना मिलना भी खुशियां देता ,
गुम होने का अफसोस नहीं,
सबको सब कुछ वो ही देता
13/1100
कर्म जहां में जैसे होगें ,
फल वैसा ही आता है ,
भला करो भला होगा,
बुरा न सुख! लाता है
13/1101
अनन्य योग का स्वादन कर,
नजदीक सदा रहता है मेरे,
भोग विषयों से दूर रहे,
जपता मुझको सायं-सबेरे
13/1102
अहंकार अभिमान से दूर ,
दम्भ भरा
ना
आचरण हो ,
सदभाव जगत में लाये वो,
ढ़ोंग भरा ना आवरण हो
13/1103
क्षमा भाव दिल में हो
,
मन वाणी से इतना सरल,
श्रद्धा-भा्व हो दिल में जिसके ,
बातों से ना होता विकल
13/1104
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल
(God
is omnipotent, omniscient and omnipresent)

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