तेरहवां अध्याय
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश engineers and technocrats के नाम ; इतना जोखिम और परेशानी के मध्य अप नी महनत व परिश्रम के प्रतिफल न केवल अनगिनत प्रोजेक्ट्स को पूरर्ण करते रहते है,बल्कि ,हम उनकी सेवाओ से प्रेरित व गौरवान्वित भी होते हैं)
अन्दर बाहर से शुद्ध ,
गुरू की सेवा दिल से ,
अन्तःकरण में स्थिर हो ,
खुशी मिले मिलके उससे
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साफ शुद्ध जिसका शरीर ,
द्वेष भाव
ना
उसकी गति,
प्रेम बांटता दुनिया में ,
वही तो पा्ता सद्गति
13/1106
लेश-मात्र ना आशाक्ति ,
लोक परलोक का मोह नहीं ,
जन्म मृत्यु जरा व रोग ,
दुख में जरा भी ओह नहीं
13/1107
ईश्वर है व्याप्त जगत में ,
ता्कतवर है सबसे वो,
बृह्माणड करे उसकी मौजूदगी,
देख रहा है सब को वो
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जैसे अपने कर्म रहे गें ,
फल भी मिलना निश्चित ,
हस्तक्षेप ना करता है ,
सुख दुख में भी किंचित
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हाथ बड़ेंहैंउसके ,
सब तक पहुँच है उसकी,
तय सीमा से आगे,
चले भला किसकी
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विषय भोग वो सब जाने ,
इन्द्रीय विकार रहित हैं वो,
पालक पोषक सबका है ,
नहीं किसी पे आश्रित वो
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निर्गुण परमबृद्म है, पार्थ
फिर भी सारे गुण हैं ,उसमें ,
जो जैसा सोचे , पार्थ
रूप देखता है उसमें
13/1112
गुण भी भोगे ,पार्थ ,
सोच हमारी चलती ,
हरज्ञान से परे है वो ,
आगे (उसके) किसकी चलती
13/113
चर अचर
जगत
में ,
पूर्णता उसमें निहित है
सब भूतों के बाहर -भीतर
उसमें सब निहित हैं
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अविज्ञेय ,अति समीप ,
दूर भी वो रहता है
अज्ञानी क्या सम झे उसको
मूर्ख जैसी बातें करता है
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काम भी उसका ,जीवन उसका
ध्ररा बनी है ए्क परीक्षा
हस्तक्षेप ना वो करता है
रहस्य यही :उसकी इच्छा
13/1116
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल
(God
is omnipotent, omniscient and omnipresent)

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