तेरहवां अध्याय
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश engineers and technocrats के नाम ; इतना जोखिम और परेशानी के मध्य अप नी महनत व परिश्रम के प्रतिफल न केवल अनगिनत प्रोजेक्ट्स को पूरर्ण करते रहते है,बल्कि ,हम उनकी सेवाओ से प्रेरित व गौरवान्वित भी होते हैं)
अधर्म मचाता हाहाकार
बदनाम धर्म को करता है
चाहे पल-2 अपनी जय-2कार
13/117
धर्म जोड़ता ईश्वर से ,
मार्ग सत्य का चुनता है,
बखान करे उसकी महिमा ,
सत्य से हमें मिलाता है
13/1118
जगत में व्याप्त है वो
राग द्वेष विकार नहीं है साथ
प्रकृति संभाले अपना जीवन,
रहते चलते जीते मरते उसके सा्थ
13/1119
त्रिगुण स्वरूप जगत में रहता,
वश अपना नहीं चलता है ,
नियम शाश्वत सत्ता कायम ,
हस्तक्षेप ना वो करता है
13/1120
हेतु बनी प्रकृति ,अर्जुन !,
उत्पन्न कार्य और का्रन है
सुख दुख भोगे जीवात्मा
प्रेम ही इसका निवारन है
13/1121
भोगे इनको जीवात्मा , अर्जुन !
ना ज्ञान भी समझे इनका कारन ,
बीच इन्हीं के रहना होता
प्रेम ही करता इनका निवारन
13/1122
प्रेम को तुम अपनाना
प्रेम से रहना ,प्रेम में मिलना
दुनिया में है प्रेम निभाना
13/1123
जीवन एक संघर्ष यहाँ,
संग- हर्ष ही लाता मीठे फल
प्रेम साथ जब चलता हो
प्रेम से निकलें सारे हल
13/1124
दुख सुख का है अनुपम मेल
सुख आता ,दुख जाता है
दुख भी ठहरे थोड़े दिन
खुशियां सुख लाता है
13/1125
पल दो पल हैं सुख पाने को
प्रेम बढ़ाता सुख का सार
कुछ पल आ्ते अपनाने को
दुख का सागर है संसार
13/1126
सुखी लोग
कम
मिलते हैं,
ये अनुभूति अजीब दुनिया में
कम ही इसे समझते हैं
छाया रहस्य है दुनिया में
13/1127
जिस दिन इस को समझ लिया,
वैर भाव सब दूर हटेगें
माया मोह से बन्धन मुक्त,
प्रेम से सारे जन रहेगें
13/1128
द्वार ह्दय के खोलो ,पार्थ !
प्रेम से सारे अपने बना ओ
प्रेम से सबको पास बुलाओ,
प्रेम में तुम भी खो जाओ
13/1129
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल
(God
is omnipotent, omniscient and omnipresent)

No comments:
Post a Comment