तेरहवां अध्याय
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश engineers and technocrats के नाम ; इतना जोखिम और परेशानी के मध्य अप नी महनत व परिश्रम के प्रतिफल न केवल अनगिनत प्रोजेक्ट्स को पूरर्ण करते रहते है,बल्कि ,हम उनकी सेवाओ से प्रेरित व गौरवान्वित भी होते हैं)
क्षेत्र उसी का ,
क्षेत्र ज्ञ है वो
बटां-2 सा लगता है
रहस्य समाया उसमें जो
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प्रेम तत्व से जानोगे ,
उस से मिलना निश्चित है
साथ मिलेगा हरपल तुमको
एहसास भी
होना
निश्चित है
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पुरुष प्रकृति आदिकाल से
साथ ये रहते हैं
ज्ञानी जन की बा्तें हैं
सत्य इसी को कहते हैं
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ईश्वर की शक्ति को
किसने समझा जाना है
जगत का स्वामी अर्न्तयामी
ज्ञान से सबने माना है
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शक्ति चारों ओर उसी की
पोषक है जगत का वो
रौद्र रूप संहारक है
संचालित करता जगत को वो
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पूर्ण है जैसे नील गगन
लगता बंटा सा वो
संकल्प मात्र सब भूतों का
देख रहा है जग को वो
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ज्योति है वह परम शक्ति (This line is to be noted here,Even the scientific research
have confirmed that after the death,the burning flame is seen by those died and
suddenly came to to life back,Remond Moody in his book Life after Death have
collected more than 150 cases with proofs,For example,The Thing of pride for us
is this that this secret was unearthed by Lord krishna and being proobed as
true today,Jai Shri Krishna)
आलोकित होता जगत का सच
मूर्ख बना इंसान जगत में
सत्य से रहता हरदम बच
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बोध रूप वह सत्य जगत का ,
वही तो है जानने योग्य ,
तत्व ज्ञान से मिलता जो,
ह्दय स्थित वो मानने योग्य
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परम तत्व को समझे ज्ञानी,
मार्ग प्रेम का चुनतेहै,
ज्ञान, कर्म ,योग्य मार्ग,
ध्यान लगा के चलते हैं
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जिस रूप में देखो !
दर्शन उसके मिलते हैं
ध्यान लगाना ,ह्दय में पाना
निकट उसी को मिल ते हैं
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मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल
(God is omnipotent, omniscient and omnipresent
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