Tuesday, 22 May 2018

83----आज का गीता जीवन पथ


तेरहवां अध्याय *Chapter 13*

_Detach from Maya & attach to Divine_

जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश engineers and technocrats के नाम ; इतना जोखिम और परेशानी  के मध्य अप नी महनत परिश्रम के प्रतिफल केवल अनगिनत प्रोजेक्ट्स को पूरर्ण करते   रहते है,बल्कि ,हम उनकी सेवाओ से प्रेरित गौरवान्वित भी होते हैं


सम्पूर्ण क्षेत्र पे दृष्टि डालो ,
तुम पाओगे क्षेत्र आलोकित
आत्मा परमात्मा का सम्पूर्ण कार्य
 होता इनसे जग पृज्जलित
13/1166
क्षेत्र जगत का क्षणभंगुर
माया मोह का खेल यहां
नाशवान ,नष्टप्राप्य !
सत्य समाया इसी जहां
13/1167
क्षेत्रज्ञ जानो अविनाशी
यात्रा करता रहता है
पडाव बदलते जीवन में
 अपनी गति से चलता है
13/1168
जिसने भेद को जान लिया
 समझ लिया वो जग की माया
परम तत्व में लीन वो रहता
पल दो पल की मोह की काया
13/1169
प्राप्त वो होता परमात्मा को
मिलन भी उनसे होता है
जगत है माया मोह की नगरी
यही हकीकत कहता है
13/1170
अध्याय समाप्त
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा

 (God is omnipotent, omniscient and omnipresent)
शेष कल

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