चौदहवां अध्याय
*Chapter 14*
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जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश के विद्यार्थियों के नाम ; इत नी महनत और परेशानी के मध्य न केवल अप ने लक्ष्य को प्राप्त करते है, बल्कि अपने सपनों को साकार रूप देते हुये देश की तरक्की में अटूट योगदान देते हैं)
सबका भला हो !
(समर्पित है देश के विद्यार्थियों के नाम ; इत नी महनत और परेशानी के मध्य न केवल अप ने लक्ष्य को प्राप्त करते है, बल्कि अपने सपनों को साकार रूप देते हुये देश की तरक्की में अटूट योगदान देते हैं)
ज्ञान से बंधा सत्य जगत में
ना कभी ये छिपता है
सुख का आधार ज्ञान है
ज्ञान सत्य से हमें जोड़ता है
14/1181
झूठ की ताकत झूठी ,
झूठ का ना होता आधार
हिंसा करे ,सहारा लेता
झूठ दिखाता है तलवार
14/1182
राग द्वेष जीवन में ,अर्जुन !,
रज गुण स्वयं सा्थ में रहता है
आसक्ति पैदा करता है
लगाव ये दिल में भरता है
14/1183
सबसे निश्चल सबसे कोमल,
निर्मल है आ्लोकित करता
सतगुण निशपाप जगत में
विकार न इसमें कोई पनपता
14/1184
दिल में अनन्त कामना जागे
प्राप्त करें ;हम करें प्रयास
अल्प -काल संतुष्टि मिलती
कभी ना बुझती अपनी प्यास
14/1185
फल की चाह तीव्र ,प्रबल
फल में ढूढ़े सन्तुष्टि
फल मिलता है जब हमको
अल्पकाल को मिलती राहत
14/1186
अभिमान देह का सबको है
नशे में,रहते सब चूर
जीवन जीना; मौज उड़ाना
अज्ञान करे हमको मजबूर
14/1187
तमगुण आलस लाता है
बैठे -2सब मिल जाये
कोई काम करे हम सबका
प्रमाद हमेशा तन मन में छाये
14/1188
कामी , क्रोधी, अत्याचारी
यही निकाले जीवन का मतलब
मौज उड़ालो इसी जिन्दगी
जीवन का सबसे बड़ा सबव
14/1189
तम गुण नीदं दिलाता है
कोधी जीवन बर्वाद करे
बने जिन्दगी फूलों की सैय्या
मन में विचार आबाद करे
14/1190
प्राप्त करें ;हम करें प्रयास
अल्प -काल संतुष्टि मिलती
कभी ना बुझती अपनी प्यास
14/1185
फल की चाह तीव्र ,प्रबल
फल में ढूढ़े सन्तुष्टि
फल मिलता है जब हमको
अल्पकाल को मिलती राहत
14/1186
अभिमान देह का सबको है
नशे में,रहते सब चूर
जीवन जीना; मौज उड़ाना
अज्ञान करे हमको मजबूर
14/1187
तमगुण आलस लाता है
बैठे -2सब मिल जाये
कोई काम करे हम सबका
प्रमाद हमेशा तन मन में छाये
14/1188
कामी , क्रोधी, अत्याचारी
यही निकाले जीवन का मतलब
मौज उड़ालो इसी जिन्दगी
जीवन का सबसे बड़ा सबव
14/1189
तम गुण नीदं दिलाता है
कोधी जीवन बर्वाद करे
बने जिन्दगी फूलों की सैय्या
मन में विचार आबाद करे
14/1190
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
(God is omnipotent, omniscient and
omnipresent)
शेष कल

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