चौदहवां अध्याय
*Chapter 14*
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जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश के विद्यार्थियों के नाम ; इत नी महनत और परेशानी के मध्य न केवल अप ने लक्ष्य को प्राप्त करते है, बल्कि अपने सपनों को साकार रूप देते हुये देश की तरक्की में अटूट योगदान देते हैं)
सबका भला हो !
(समर्पित है देश के विद्यार्थियों के नाम ; इत नी महनत और परेशानी के मध्य न केवल अप ने लक्ष्य को प्राप्त करते है, बल्कि अपने सपनों को साकार रूप देते हुये देश की तरक्की में अटूट योगदान देते हैं)
सुख (सच्चा ) लाता है सतगुण
रजगुण कर्म को सिंचित करता है
व्यर्थ चेष्टायें मन की !
तम गुण भरता रहता है
14/1192
रज गुण ,तम,गुण,छिपता है,
सतगुण अपना काम करे
तम गुण,सत गुण छिपता है
रज गुण अपना सवाल करे
14/1193
जब रज गुण सत गुण दूर रहें,
तम गुण का है बोलबाला
कितना भी समझाओ ,बताओ
तम गुण उसका रखवाला
14/1194
चेतनता आती देह हमारी,
मिले विवेक मन को
अन्तकरण जब साफ शुद्ध ,
सतगुण मिलता तन मन को
14/1195
रज गुण बढ़ता, स्वार्थ बढ़ाता
लालच की ना सीमा होती
तृष्णा प्यासी रहती है
अनन्त कामना पैदा होती
14/1196
सकाम भा्व कर्म में होता
फल की इच्छा सा्थ में चलती
चाहत पहले ;फल मिल जाये
अल्पकाल की शान्ति मिलती
14/1197
आरम्भ काम का जब होता
मन में अशन्ति होती है
फल ना फिस ले हाथों से
हलचल दिल में होती है
14/1198
बढ़े लालसा विषय भोग की
तृप्ति कभी न मिलती है
शांति मन में न रह ती
चाहत की सीमा ना होती है
14/1199
बढ़ता है जब तम गुण
अंधकार छा जाता है
विषाद प्रिय होता है मानव
माया में खो जाता है
14/11200
कर्तव्य विमुख हो जाता है
तृष्णा बढ़ती जाती है
मन मोहित हो जाता है
जब सत्य से दूरी बढ़ती है
14/1201
सतगुड़ी पुरुष जब मरता है
मिलता सम्मान उसे
दरवाजे स्वर्ग के खुले हुए हैं
कही न मिलता अपमान उसे
14/1202
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
(God is omnipotent, omniscient and
omnipresent)
शेष कल

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