Monday, 28 May 2018

87---आज का गीता जीवन पथ


चौदहवां अध्याय 
*Chapter 14*
_Live a lifestyle that matches your vision_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(
समर्पित है देश के विद्यार्थियों के नाम ; इत नी महनत और परेशानी के मध्य केवल अप ने लक्ष्य को प्राप्त करते  है, बल्कि अपने सपनों को साकार रूप देते हुये देश की तरक्की में अटूट योगदान देते हैं)
रजगुण भी अपना खेल दिखाता
जब भी मरता पुरुष यहां
कर्तव्य बोध से बधंता है
 मिलता उसको यही जहां
14/1203
क्रम उसका चलता रहता
कर्तव्य बोध लेता जीता
आता-जाता जीवन मिलता
 कभी क्रम नहीं मिलता रुकता
14/1204
मृत्यु वरण करती है तम गुण
 पुनः ना मानव जीवन मिलता
 कीट पतंगे पशु पक्षी
 अनुरूप उसी के जीवन मिलता
14/1205
सतगुण से मिलता है सुख सच्चा
 निर्मल, पावन, स्वच्छ, भला
 रज गुण लाता दुख यहां
तम से होता नहीं भला
14/1206
अज्ञान से तम होता है
चलने ज्ञान की न देता
 अन्धकार हो जीवन में
तम जीवन में भर देता
14/1207
ज्ञान तो लाता सतगुण
सदा-2 को होता है
लोग सीखते ,लोग समझते
तम को बाहर कर देता
14/1208
द्वेष ,लोभ,लालच, जलन
 स्वार्थभरा जीवन बनता
रज गुण पैदा करें अनन्त कामना
जीव को मोहित करता रहता
14/1209
सारे पापों की जड तम है
जिसको जो अधिकार मिला
सत्ता नशा दिलाती है
 मन भी कहीं दूर चला
14/1210
आपाधापी अपनापन
सब कुछ मेरा मेरा है
अज्ञान रहे मन पे हा्वी
लगता सुख का डेरा है
14/1211
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा
 (God is omnipotent, omniscient and omnipresent)
शेष कल

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