Tuesday, 29 May 2018

88---आज का गीता जीवन पथ


चौदहवां अध्याय 
*Chapter 14*
_Live a lifestyle that matches your vision_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(
समर्पित है देश के विद्यार्थियों के नाम ; इत नी महनत और परेशानी के मध्य केवल अप ने लक्ष्य को प्राप्त करते  है, बल्कि अपने सपनों को साकार रूप देते हुये देश की तरक्की में अटूट योगदान देते हैं)



सतगुण है कष्ट भरा ,
ज्ञान का अथाह सागर
ज्ञान झलकता पल्-2 है
जैसे नीर भरी गागर
14/1212
स्वर्ग लोक या उच्च लोक
सतगुण करे निवास
कभी निराशा आये
 कभी ना सुख दुख; रहती आस
14/1213
निवास है रज़गुण का दुनिया में ,
मानव लोक में विचरण करता,
भोग, लालसा, स्वार्थ ,मोह,
बढ़ चढ़कर जीवन में रहता
14/1214
तम गुण ज्ञान से दूर रहे ,
अज्ञान की नदियां बहती है ,
कीट -पतंगों का जीवन
 सदियां इन को सहती हैं
14/1215
मनन करो इस दुनियां में ,
इन गुणों का है निवास ,
गिरफ्त में सभी हम रहते
 और करते हैं विश्वास
14/1216
बाद में इनके परम तत्व है,
 जो जाना जीवन का मर्म ,
वही तत्व सर्वोत्तम है ,
इसे मानना ;कौन सी शर्म
14/1217
वही है मानव सब से महान ,
परम तत्व को प्राप्त करे ,
जन्म मृत्यु वृद्धावस्था
स्वयं से सबसे मुक्त करे
14/1218
परमानन्द की प्राप्ति है ,
परम तत्व से साक्षात्कार ,
खुशी की अन्तिम सीमा है
जीवन में आती उनके बहार”
14/1219

भ्रमित हुये अर्जुन ,फिर से
समझ सके ना परम त्य
फिर बतलाओे प्रभु,मुझको
क्या फर्क रखे सत्य असत्य?
14/1220
लक्षण हम से दूर रहे,
 कैसे इसको समझे ?
व्यवहार कौन सा जीवन में !,
दूर ना हो ; सत को बूझें
14/1221



प्रकाश करें जिनको आलोकित,पार्थ!,
ज्ञान की फैले जलती ज्योति,
करो प्रयास सत-गुण जानो ,
जहाँ ज्ञान के मिलते मोती
14/1222
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा
 (God is omnipotent, omniscient and omnipresent)
शेष कल


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