Thursday, 21 June 2018

102----आज का गीता जीवन पथ



17वां अध्याय 

Chapter 17*
__Choosing the right over the pleasant is a sign of power_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(1 7वां अध्याय समर्पित है सभी वन रक्षक व वन अधिकारियों के नाम; जिनकी मेहनत से देश -विदेश हरा -भरा रहता है ,और हम सभी को प्रेरित  करते हैं)

अन्याय मिटे ,अंत्याचार मिटे
पहला अपना काम जगत में
सत नाम को लाना बहुत जरूरी
श्रद्धा प्यार बढ़े जगत में
17/1377
चिंतन कर्म जहां में ,पार्थ
 सबको करना शुभ ही शुभ
नाम उसी का छाया है
बात ना समझो तुम अशुभ
17/1378
यज्ञ ज्ञान और तप
भजन दान और दक्षिणा
समझो नाम से उसके काम
 समझो यही तुम्हारी प्रदक्षिणा
17/1379
श्रद्धा दिल में ना रहती
काम करो तुम बे मन
वक्त करो बर्बाद अपना
 सुख ना देता कोई जन मन
17/1380
 श्रद्धा है पर्याप्त जगत में
नाम भी ले लो पावन भाव
जो ध्यान लगा है परम तत्व
 ना होता जीवन में अभाव
17/1381
इसका होना ;ना होना है
कल्याण मानव का रहता दूर
ना हित सधता पृथ्वी लोक में
 परलोक भी रहता पहुंच से दूर
17/1382
श्रद्धा भाव सदा रखना
सत का नाम जपते रहना
कल्याण सभी का करते जाना
याद रखेगा तुम्हें जमाना
17/1383
उपकारी बनना यहां जरूरी
सात्विक मार्ग को अपनाना
 यही मूल्य है दान दक्षिणा
विद्युत जन को भी देना
17/1384
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा

 (God is omnipotent, omniscient and omnipresent)

शेष कल

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