Wednesday, 27 June 2018

106----आज का गीता जीवन पथ


 
18वां अध्याय 

*Chapter 18*
_Let Go, Lets move to union with God_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(1 8 वां अध्याय समर्पित है सभी शिक्षकों के नाम;  जिनकी मेहनत से देश-विदेश में बच्चों का जीवन न केवल ज्ञानवान व समृद्धशाली बनता है बल्कि स्वयं को मोमबत्ती की तरह जला कर देश- विदेश में उजाला करते हैं , जिनके लिए समाज कृतज्ञ रहता है अतः हम सबको और भी परिश्रम कर देश  का नाम रोशन करना चाहिए. गीता पाठ से स्पष्ट है कि जीवन में ;अंत में कुछ भी नहीं)

 अच्छा बुरा परिणाम मिलता है
फल इच्छा न त्याग सके
जन्म-जन्मांतर का क्रम है
कभी ना इनसे बच सके
18/1408
हिम्मत जिसमें ना होती
 फल इच्छा मन को मोहती
दंड है उनका अवश्यंभावी
साथ ना किस्मत उनका देती है
18/1409
मोह ना ममता का आकर्षण
दिल भी उनका रहता मजबूत
कभी न  दंड के  भागी होते
सदा ही रहता उनका वजूद
18/1410
शास्त्र उपाय बताते ,पार्थ
मूर्खों न जाने उनका आधार
पंचकर्म अपनाना !अर्जुन
 तुम्हें बताता सबका सार
18/1411
 ध्यानपूर्वक सुनना ,अर्जुन
आशा की तुम नई किरण
जग भी आलोकित होता है
सत्य भी लेता तेरी शरण
18/1412
कर्म की सिद्धि करते हैं
 अधिष्ठान की जाते शरण
कर्म हमारे अलग-अलग है
भिन्न है उनके सभी करण
18/1413
चेष्टा भी अलग-अलग है ,
 पांचवां संस्कार है देव
वह धरा पर व्याप्त है
अचरज होता हमको सदैव
18/1414
मन ,वाणी ,शरीर, कर्म,
शास्त्र भी देते हमें सलाह
विपरीत कर्म करता है जो
 मुश्किल होता उसका निर्वाह
18/1415
 सत्संग जरूरी आवश्यक है
मन की बुद्धि होती शुद्ध
पाप से हमको यही ब चाती
 जीवन जीते पूर्ण विशुद्ध
18/1416
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा

 (God is omnipotent, omniscient and omnipresent)


शेष कल

No comments:

Post a Comment

गीता जीवन पथ: 117----- आज का गीता जीवन पथ

गीता जीवन पथ: 117----- आज का गीता जीवन पथ : 18वां अध्याय  *Chapter 18* _Let Go, Lets move to union with God_ जय श्री कृष्णा. सबका भल...