Monday, 4 June 2018

89-आज का गीता जीवन पथ



15वां अध्याय 

*Chapter 15*
Give priority to Divinity_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश के बच्चों के नाम ,जिनका मुस्कुराहट से भरा हुआ चेहरा हमारी न केवल थकान को मिटा देता है , बल्कि कल के भविष्य के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित करता है)

संसार है अपना वृक्ष समान,
 पाती वेदमंत्र माने
जो समझे मूल तत्व को
वही वेद की महिमा जाने
15/1243
 आदि पुरुष परमेश्वर है
इसका पालनहार है जाना
वासुदेव भगवान वही है
 संसार प्रेम से जिसने जाना
15/1244
 अविनाशी यह वृक्ष मान
इन से बहती ज्ञान की महिमा
 लोग समझते  इसका मतलब
 बढ़ती इनसे सबकी गरिमा
15/1245
शब्द स्पर्श रूप रस गंध
नवीन को पलें  आती हैं
 त्रिगुण सीचते जल इनको
शाखा बढ़ती जाती है
15/1246
शाखा का मतलब है ;
त्रियक ,देव और मानव
होता इनसे विस्तार जगत में
पैदा जीव, जंतु और दानव
15/1247
अंधकार ,ममता ,मोह
माया पैदा करे कामना
 कर्मों में ब न्ध जाता इंसा
 घर करती है बुरी भावना
15/1248
नव कर्मों से ही अपना
भाग्य बनाता है मानव
फल भोगे पिछले कर्मों का
सुख भी भोगे मानव और दानव
15/1249
ममता अहं वासना
  ड़ इन की बढ़ती है
 बांधे दुनिया को सारी
ऊपर नीचे चढ़ती है
15/1250
विषय भोग हैं पुरुष यहां ,
माया मोह के जाल फसा
मेरा अपना है बस !
 लगता ;मिलता यही दगा
15/1251
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा

 (God is omnipotent, omniscient and omnipresent)

शेष कल

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