Thursday, 7 June 2018

91---आज का गीता जीवन पथ



15वां अध्याय 
*Chapter 15*
Give priority to Divinity_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(
समर्पित है देश के बच्चों के नाम ,जिनका मुस्कुराहट से भरा हुआ चेहरा हमारी न केवल थकान को मिटा देता है , बल्कि कल के भविष्य के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित करता है)
 ज्ञानी पुरुष वही है
जिसने प्रभु की ली शरण
कुछ मिले या ना मिले
उसको मिलते प्रभु चरण
15/1263
मिली है उसको मुक्ति
 जिसने विजय किये अवगुण
स्थान दिया ना उनको जो
 पास में रहते केवल सद्गुण
15/1264
जीत लिया है माया-मोह
लगाव किसी से ना रखता
विराम मिले अनंत कामना
खुशी से जीवन यापन करता
15/1265
सुख-दुख का फर्क नहीं
 एक सिक्के के दो पहलू
आना जाना एक समान
रहे भावना सदा ही सह लू   
15/1266
उसका लक्ष्य ध्यान में उसके
परमतत्व है उसकी सत्ता
गति जीवन को मिले यहां
बिन इच्छा ना हिले भी पत्ता
15/1267
 आना-जाना क्रम जीवन का
मिलता उसको छुटकारा
 परमानंद वह जीता है
 दुनिया में सब उससे हारा
15/1268
परमधाम है वास उसका
स्वयं प्रकाशित होता है
ना ही अग्नि ,चंदा, सूरज
उसे प्रकाशित करता है
15/1269
सूर्य रोशनी एक है
फिर भी लगती बढ़ती
अलग-अलग है जहां प्रकाशित
कहीं ये बढ़ती ,कहीं ये घटती है
15/1270
जीवन अंश परमतत्व का
लगता बढ़ता है इसी जहां
मूलतत्व एक है
कभी ना ब टं ता सारा जहां
15/1271
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा
 (God is omnipotent, omniscient and omnipresent)

शेष कल


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