Friday, 8 June 2018

92----आज का गीता जीवन पथ



15वां अध्याय 
*Chapter 15*
Give priority to Divinity_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(
समर्पित है देश के बच्चों के नाम ,जिनका मुस्कुराहट से भरा हुआ चेहरा हमारी न केवल थकान को मिटा देता है , बल्कि कल के भविष्य के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित करता है)

मूल भाव में वही समाया
उसका रूप जहां मैं एक
वह तो निरंकार परमसत्ता
लगते- दिखते रूप अनेक
15/1272
मुझ में भगवन, तुझ में भगवन
अं श है उसका जीवन
 जिस दिन छिपता प्रकाश बदन में
मिट जाता यह प्यारा उपवन
15/1273
 वायु बहती ,साथ में लेती
व्याप्त हो जहां भी गंद
जहां भी जाती ,वह फैलाती
दुर्गंध रहे या चाहे सुगन्ध
15/1274
आत्मा त्यागे मृत शरीर
प्रवेश ये पाती नया शरीर
भाव साथ में ले जाती है
 देनी होती ना तहरीर
15/1275
मन से लेती है आश्रय
 इंद्रियों का यह भोग करे
इन्हीं स हारे सेवा करती
जीवन का ये भोग करे
15/1276
अज्ञानी ना करें विश्वास
आंखों पर उनका विश्वास
आंखें देखती मानते उसको
दूर रहे या आये पास
15/1277
आंखों की सीमा होती है
 सब कुछ देख ना पाती हैं
ज्ञानी देखे ज्ञान के माध्यम
रहस्य समझ में लाती हैं
15/1278
अज्ञानी क्या समझेंगे
 वास शरीर में इसका है
 छोड़ के जाती , विषय भोगती
रहस्य अनूठा इसका है
15/1279
रहस्य योगी समझे खेल जगत का
जी व विराजे अंश परमतत्व
बिन इसके ना जीवन है
 यही जानना परम सत्य
15/1280
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा
 (God is omnipotent, omniscient and omnipresent)

शेष कल

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